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बच्चों की डेटा सुरक्षा के लिए DPDP नियमों में बदलाव करेगी सरकार, जानें इससे होने वाले लाभ

बच्चों की डेटा सुरक्षा के लिए DPDP नियमों में बदलाव करेगी सरकार, जानें इससे होने वाले लाभ

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को कहा कि बच्चों को डिजिटल दुनिया में होने वाले खतरों से बचाने और उन्हें टेक्नोलॉजी से जोड़ने के उद्देश्य से डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) नियमों को और बेहतर बनाया जाएगा। संवाददाताओं से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि DPDP नियमों को उनके कार्यान्वयन से प्राप्त अनुभवों के आधार पर परिष्कृत किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम DPDP नियमों को इस तरह परिष्कृत करेंगे कि बच्चों को किसी भी प्रकार के नुकसान से बचाते हुए टेक्नोलॉजी का लाभ पहुंचाया जा सके।”

सरकार ने 3 जनवरी को DPDP नियम, 2025 का मसौदा जारी किया था, जिस पर जनता 18 फरवरी 2024 तक अपने सुझाव दे सकती है। इस मसौदे के अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म बच्चों के डेटा का उपयोग तभी कर सकते हैं जब उनके सत्यापित अभिभावक या माता-पिता की सहमति हो। सत्यापन के लिए पहचान और आयु के बारे में स्वेच्छा से प्रदान की गई जानकारी का उपयोग किया जा सकता है या किसी अधिकृत इकाई द्वारा जारी वर्चुअल टोकन का सहारा लिया जा सकता है।

गोपनीयता को कोई खतरा नहीं:
वैष्णव ने कहा कि सत्यापन के लिए वर्चुअल टोकन का उपयोग आधार आधारित लेन-देन में पहले ही सफल साबित हुआ है। ये टोकन अस्थायी होंगे और एक ही लेन-देन तक सीमित रहेंगे। इसके बाद इन्हें स्वचालित रूप से नष्ट कर दिया जाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि यदि आवश्यक हुआ तो क्षेत्र-विशेष के लिए अलग-अलग दिशानिर्देश तैयार किए जा सकते हैं, जिसमें विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों की सलाह शामिल होगी। मंत्री ने आश्वासन दिया कि वर्चुअल टोकन आधारित सत्यापन प्रक्रिया से किसी व्यक्ति की गोपनीयता को कोई खतरा नहीं होगा।

इसके अलावा, उन्होंने कहा कि डीपीडीपी अधिनियम व्हिसलब्लोअर्स पर कोई असर नहीं डालेगा, क्योंकि उन्हें इस कानून के तहत सुरक्षा दी गई है। शिकायत दर्ज करने की कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है, जिससे लोग अपनी समस्याओं को सहजता से सामने रख सकते हैं।

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