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बिहार में रिकॉर्ड तोड़ मतदान पर PK का बयान — प्रवासी मजदूर और युवाओं ने लिखी नई कहानी

बिहार में रिकॉर्ड तोड़ मतदान पर PK का बयान — प्रवासी मजदूर और युवाओं ने लिखी नई कहानी

बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार रिकॉर्ड तोड़ मतदान देखने को मिला है. 65.08 प्रतिशत वोटिंग आज़ादी के बाद अब तक की सबसे ज्यादा रही है. इस अप्रत्याशित मतदान ने सभी राजनीतिक दलों और विश्लेषकों को चौंका दिया है. राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने इस बढ़े हुए मतदान के पीछे दो अहम कारण बताए हैं — जनता में बदलाव की तीव्र इच्छा और प्रवासी मजदूरों की अप्रत्याशित भागीदारी.

चुनाव आयोग के मुताबिक पहले चरण की 121 विधानसभा सीटों पर इस बार 65.08 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जबकि 2020 के विधानसभा चुनाव में यह आंकड़ा केवल 57.29 प्रतिशत था. प्रशांत किशोर, जिनकी जन सुराज पार्टी पहली बार इस चुनावी मैदान में उतरी है, ने कहा कि यह आंकड़ा स्पष्ट संकेत देता है कि बिहार की जनता इस बार बदलाव चाहती है. उन्होंने कहा कि लंबे समय से राज्य की जनता निराश थी क्योंकि उसे कोई ठोस विकल्प नहीं दिख रहा था, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं.

प्रशांत किशोर का मानना है कि जन सुराज के आगमन ने बिहार के मतदाताओं को एक नया राजनीतिक विकल्प दिया है, जिसके चलते जनता में वोट डालने का उत्साह बढ़ा है. उन्होंने कहा कि यह वोट प्रतिशत दिखाता है कि राज्य के 60 प्रतिशत से अधिक लोग बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाना चाहते हैं.

उन्होंने आगे कहा कि इस बार प्रवासी मजदूरों ने भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाई है. बिहार से बड़ी संख्या में लोग रोज़गार के लिए बाहर जाते हैं और सामान्यत: मतदान में हिस्सा नहीं ले पाते. लेकिन इस बार छठ पर्व के बाद बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर राज्य में ही रुके और उन्होंने मतदान में सक्रिय रूप से भाग लिया. न सिर्फ उन्होंने खुद वोट डाला बल्कि अपने परिवार और परिचितों को भी मतदान के लिए प्रेरित किया.

किशोर ने कहा कि इस बार युवाओं का उत्साह भी देखने लायक था. पहली बार बड़ी संख्या में युवाओं ने मतदान किया और यह संकेत है कि वे मौजूदा व्यवस्था से असंतुष्ट हैं और राज्य में सुधार चाहते हैं. उन्होंने बताया कि किसी भी पार्टी या विश्लेषक ने इस बार मतदान में इतनी बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं की थी.

प्रशांत किशोर का मानना है कि बढ़ी हुई वोटिंग जनता की सोच में हो रहे परिवर्तन को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि बिहार अब एक नए राजनीतिक अध्याय की ओर बढ़ रहा है, और यह मतदान उसी बदलाव का संकेत है.

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