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मनरेगा की विदाई तय, संसद से पास हुआ वीबी-जी राम जी बिल; विपक्ष का जोरदार विरोध

मनरेगा की विदाई तय, संसद से पास हुआ वीबी-जी राम जी बिल; विपक्ष का जोरदार विरोध

संसद ने विपक्ष के कड़े विरोध और भारी हंगामे के बीच विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) – वीबी-जी राम जी बिल को मंजूरी दे दी है। यह विधेयक अब तक लागू रही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में हर साल 125 दिन के रोजगार की गारंटी का प्रावधान करेगा। गुरुवार को पहले लोकसभा और फिर देर रात राज्यसभा ने इस बिल को पारित कर दिया। राज्यसभा में इसे ध्वनि मत से पास किया गया।

बिल के पारित होने के दौरान विपक्ष ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार ने मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाकर उनकी स्मृति का अपमान किया है और इस नई योजना से राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की, बिल की प्रतियां फाड़ीं और इसे वापस लेने की मांग की। इस दौरान सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदस्यों को मर्यादा में रहने की चेतावनी दी। हंगामे के बाद कई विपक्षी सांसदों ने वॉकआउट किया और संसद परिसर में संविधान सदन के बाहर धरने पर बैठ गए। विपक्ष ने इस मुद्दे पर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

इस बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों ने संविधान सदन की सीढ़ियों पर 12 घंटे के धरने का ऐलान किया। विपक्ष की यह भी मांग थी कि बिल को संसदीय समिति के पास भेजा जाए, लेकिन सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया। राज्यसभा में करीब पांच घंटे चली चर्चा के बाद ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकार की ओर से बिल का जोरदार बचाव किया।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह बिल ग्रामीण भारत के विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार के दौरान मनरेगा भ्रष्टाचार से ग्रस्त रही और अपेक्षित विकास कार्य नहीं हो पाए। चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य “विकसित भारत” बनाना है और इसमें गांवों का सशक्त होना सबसे अहम है। उन्होंने विपक्ष के हंगामे को लोकतंत्र का अपमान बताते हुए कहा कि संसद दादागिरी से नहीं चल सकती। मंत्री ने यह भी कहा कि भाजपा ने हमेशा गांधीजी को अपना आदर्श माना है और उनकी सामाजिक-आर्थिक सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।

लोकसभा में भी इस बिल पर करीब आठ घंटे की बहस हुई, जहां विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया। चर्चा के दौरान मंत्री ने कहा कि मनरेगा अब अपने मौजूदा स्वरूप में पुरानी पड़ चुकी योजना है और अब ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियोंजल संरक्षणग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर और मौसम से जुड़े कार्यों पर बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत है। उनके मुताबिक आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों में 10–11 लाख करोड़ रुपये तक खर्च किए जाएंगे।

अब यह बिल राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद सरकार इसे अधिसूचित करेगी और तब यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा। माना जा रहा है कि सरकार इसे जल्द लागू करना चाहती है, ताकि आगामी बजट सत्र में इसके लिए आवश्यक धनराशि का प्रावधान किया जा सके।

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