महाकुंभ 2025 भगदड़ में 82 की मौत का दावा, 26 पीड़ित परिवार लिस्ट से बाहर, कैश में दिए गए 5 लाख रुपये!
प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2025 के दौरान मौनी अमावस्या (29 जनवरी) के दिन हुई भगदड़ को लेकर अब एक नई रिपोर्ट ने हलचल मचा दी है। बीबीसी हिंदी की विशेष पड़ताल में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं।
जहां यूपी सरकार की आधिकारिक रिपोर्ट 37 लोगों की मौत की पुष्टि करती है, वहीं बीबीसी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि असल में इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 82 श्रद्धालुओं की जान गई थी।
रिपोर्ट में सामने आया है कि 26 परिवारों को मृतकों की आधिकारिक सूची में शामिल नहीं किया गया, बावजूद इसके उन्हें 5-5 लाख रुपये की नकद राशि दी गई।
इन परिवारों के पास ऐसे वीडियो और फोटो भी हैं, जिनमें यूपी पुलिस को पैसे देते हुए देखा जा सकता है। इतना ही नहीं, कई परिजनों ने दावा किया है कि उनसे जबरन ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए , जिनमें मौत का कारण “अचानक तबीयत बिगड़ना” बताया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक मारे गए 82 लोगों के परिजनों को तीन समूहों में बांटा गया:
पहली कैटेगरी : 25-25 लाख रुपये मुआवजा पाने वाले परिवार (सरकारी सूची में शामिल)। दूसरी कैटेगरी 5-5 लाख रुपये नकद में पाने वाले परिवार (26 परिवार)। तीसरी कैटेगरी ऐसे 19 परिवार जिन्हें कोई मुआवजा नहीं मिला।
5 लाख रुपये कैश पाने वाले परिवारों में:
उत्तर प्रदेश के 18,बिहार के 5,पश्चिम बंगाल के 2
झारखंड का 1 परिवार शामिल है। इन भुगतानों का कोई वैधानिक रिकॉर्ड नहीं मिला है, जिससे यह सवाल उठने लगे हैं कि सरकार ने क्या इस हादसे के असल आंकड़े छिपाने की कोशिश की |
बीबीसी रिपोर्ट यह भी बताती है कि मौनी अमावस्या के दिन महाकुंभ में चार अलग-अलग स्थानों पर भगदड़ की घटनाएं हुईं, लेकिन सरकारी आंकड़ों में यह विवरण नहीं मिलता। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में 37 मौतों की बात कही थी और बताया था कि 35 परिवारों को 25-25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, जिन 82 मौतों की बात कही गई है, उन सभी के पीछे प्रत्यक्षदर्शी गवाह, सबूत और स्थानीय लोगों की पुष्टि मौजूद है। यह सवाल अब तेजी से उठ रहा है कि क्या सरकार ने महाकुंभ हादसे की सच्चाई को दबाने की कोशिश की? और यदि हां, तो क्यों? इस रिपोर्ट ने महाकुंभ की चमकदार तस्वीर के पीछे छिपे काले सच को एक बार फिर सामने ला दिया है।