शराब और डिमेंशिया का गहरा कनेक्शन: नई स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा, कोई भी मात्रा सुरक्षित नहीं l
नई रिसर्च ने यह सख्त सच उजागर किया है कि शराब पीना दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव डालता है और डिमेंशिया का खतरा बढ़ा सकता है। ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और अमेरिकी येल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 5 लाख से अधिक लोगों पर किया अध्ययन दर्शाता है कि शराब की कोई भी मात्रा डिमेंशिया के जोखिम को बढ़ा सकती है। यह स्टडी पहले के अनुमानित विचारों का खंडन करती है कि कम या मध्यम मात्रा में शराब पीना मस्तिष्क के लिए फायदेमंद हो सकता है.
स्टडी की मुख्य बातें
सप्ताह में 1 से 3 अतिरिक्त पेय पदार्थ पीने से डिमेंशिया का खतरा 15% तक बढ़ जाता है।
शराब पीने के अनुवांशिक जोखिम वाले लोगों में डिमेंशिया का खतरा 16% अधिक पाया गया।
किसी भी स्तर पर शराब का सेवन डिमेंशिया के खतरे को बढ़ाता है, कोई भी सुरक्षित सीमा नहीं है।
शराब छोड़ने वाले जिन्हें अल्कोहल निर्भरता होती थी, उनमें भी डिमेंशिया का खतरा अधिक पाया गया।
इस अध्ययन में जनसंख्या आधारित डेटा के साथ-साथ अनुवांशिक विश्लेषण (मैंडेलियन रैंडमाइजेशन) का उपयोग किया गया, जिससे यह पता चला कि शराब पीने की वजह से मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान होता है और मस्तिष्क की कार्यक्षमता में कमी आ सकती है। इसके विपरीत, पहले के कुछ अध्ययनों ने मध्यम मात्रा में शराब पीने को दिमाग के लिए सुरक्षित माना था, लेकिन यह नई स्टडी बताती है कि यह धारणा गलत है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक शराब पीने की कोई भी “सुरक्षित” मात्रा तय नहीं की जा सकती। महिलाओं के लिए सप्ताह में 10 ड्रिंक और पुरुषों के लिए 15 ड्रिंक की सीमा स्वास्थ्य मानकों में बताई जाती थी, लेकिन आ रही नई सूचनाएं इसमें संशय पैदा करती हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि डिमेंशिया से बचाव के लिए शराब का सेवन कम से कम किया जाना चाहिए या पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए.
शराब के सेवन से मस्तिष्क की कोशिकाएं प्रभावित होती हैं, जो धीरे-धीरे न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों का कारण बनती हैं। डिमेंशिया एक ऐसी अवस्था है जिसमें स्मृति खोना और मानसिक कार्यक्षमता कम हो जाती है, जो वृद्धावस्था में विशेष रूप से देखी जाती है। शराब मस्तिष्क की कोशिकाओं को सीधे नुकसान पहुंचाती है और ऑक्सीकरण तथा सूजन प्रक्रियाओं को बढ़ावा देती है, जिससे दिमागी क्षति होती है.