शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म? NSE के प्रमुख ने बताया कि भारतीय निवेशक शेयर बाजार में कहां निवेश कर रहे हैं
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने वालों की संख्या में अचानक बड़ी बढ़ोतरी देखी गई है। खास बात यह है कि इन नए निवेशकों में आम लोगों की भागीदारी काफी अधिक है, और इनमें महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हो रही हैं। भारतीय बाजार में घरेलू निवेशकों के साथ-साथ विदेशी निवेशकों का भी भारी पूंजी निवेश है। हालांकि, विदेशी निवेशकों द्वारा हो रही भारी बिकवाली के कारण भारतीय बाजार फिलहाल मुश्किल दौर से गुजर रहा है। लेकिन इसी बीच एक ऐसी जानकारी सामने आई है, जो आपको चौंका सकती है।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रबंध निदेशक और सीईओ आशीष कुमार चौहान ने कहा कि अधिकांश भारतीय निवेशक लॉन्ग टर्म यानी लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं। उन्होंने बताया कि 11 करोड़ बाजार प्रतिभागियों में से केवल 2 प्रतिशत ही सक्रिय रूप से फ्यूचर्स और ऑप्शन (F&O) में ट्रेडिंग करते हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि देश में अनुशासित और स्थायी निवेश की संस्कृति बढ़ रही है। सिंगापुर में हाल ही में हुई एक समूह चर्चा में उन्होंने इस धारणा को खारिज किया कि भारत का शेयर बाजार मुख्य रूप से सट्टेबाजी से प्रेरित है।
भू-राजनीति अर्थशास्त्र को प्रभावित करती है
एनएसई ने एक बयान में कहा कि आशीष कुमार चौहान ने इस दौरान उभरते वित्तीय परिदृश्य, प्रौद्योगिकी के माध्यम से पूंजीवाद के विकास और वैश्विक बाजारों की बढ़ती जटिलताओं के बारे में चर्चा की। उन्होंने वित्तीय स्थिरता के पारंपरिक दृष्टिकोण को फिर से परिभाषित करते हुए कहा कि अस्थिरता कोई कमजोरी नहीं है, बल्कि यह आर्थिक प्रगति का एक अभिन्न हिस्सा है। चौहान ने यह भी कहा कि बाजार में उतार-चढ़ाव अक्सर आर्थिक कारकों की बजाय भू-राजनीतिक परिवर्तनों के कारण होते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘भू-राजनीति अर्थशास्त्र को नाश्ते की तरह खा जाती है।’’
इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय बाजार में निवेशकों का रुझान लंबी अवधि के निवेश की ओर है, और भू-राजनीतिक घटनाएं अर्थव्यवस्था को गहराई से प्रभावित करती हैं।