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‘सत्ता की मास्टर चाबी वोट और एकता में है’, मायावती ने कार्यकर्ताओं को दिया चुनावी मंत्र

लखनऊ, 10 जुलाई। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से एकजुट रहने तथा वोट की ताकत को सबसे बड़ा हथियार बताते हुए सत्ता हासिल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा बताए गए संवैधानिक और शांतिपूर्ण […]

‘सत्ता की मास्टर चाबी वोट और एकता में है’, मायावती ने कार्यकर्ताओं को दिया चुनावी मंत्र

लखनऊ, 10 जुलाई। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से एकजुट रहने तथा वोट की ताकत को सबसे बड़ा हथियार बताते हुए सत्ता हासिल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा बताए गए संवैधानिक और शांतिपूर्ण मार्ग पर चलते हुए ही समाज के वंचित वर्ग अपने अधिकार सुरक्षित कर सकते हैं।

शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में मायावती ने कहा कि अनुसूचित जाति, पिछड़े, पीड़ित और कमजोर वर्गों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए भावनाओं में बहने के बजाय लोकतांत्रिक और संवैधानिक रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि “अपनी एकता और वोट की ताकत से सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करनी होगी, क्योंकि यही लाख दुखों की एक दवा है।”

उन्होंने कहा कि बसपा लगातार इसी दिशा में कार्य कर रही है और समाज के लोगों को विधानसभा, लोकसभा तथा निकाय चुनावों में पूरी सतर्कता के साथ अपने मताधिकार का उपयोग करना चाहिए।

बाबा साहेब के विचारों का किया उल्लेख

मायावती ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने अपनी बुद्धिमत्ता, दूरदर्शिता और संघर्ष के बल पर दलित, शोषित और कमजोर वर्गों को अनेक संवैधानिक और कानूनी अधिकार दिलाए। उन्होंने कहा कि इन अधिकारों का वास्तविक लाभ तभी मिल सकता है, जब सत्ता की बागडोर समाज के हाथों में होगी।

उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के माध्यम से अधिकारों की लड़ाई लड़ने का रास्ता दिखाया था और उसी मार्ग पर आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

सड़क पर बवाल नहीं, संवैधानिक लड़ाई लड़ने की अपील

बसपा प्रमुख ने कार्यकर्ताओं से किसी भी मुद्दे पर उत्तेजित होकर सड़क पर हिंसक प्रदर्शन या बवाल करने से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में न्याय नहीं मिलता है तो कानून के तहत निचली अदालत से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक न्याय की लड़ाई लड़ी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में जिस तरह सड़क पर उतरकर हिंसक विरोध प्रदर्शन किए जाते हैं, उस रास्ते पर चलने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संयम बनाए रखने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से अपने अधिकारों की रक्षा करने का आह्वान किया।

2027 के चुनाव पर भी नजर

मायावती के बयान को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि बसपा की रणनीति सामाजिक एकजुटता, संवैधानिक संघर्ष और वोट की ताकत के माध्यम से सत्ता हासिल करने पर केंद्रित रहेगी।

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