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सरकार से उम्मीद छोड़ गांववालों ने खुद अपनी मेहनत की कमाई से पुल बनाया…अब होगी जांच

सरकार से उम्मीद छोड़ गांववालों ने खुद अपनी मेहनत की कमाई से पुल बनाया…अब होगी जांच

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में मगई नदी पर ग्रामीणों द्वारा चंदा इकट्ठा कर पुल का निर्माण किया जा रहा है। इस पुल की पहल सेना के एक सेवानिवृत्त जवान ने की, जिससे स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन चिंतित है। प्रशासन का कहना है कि पुल निर्माण के प्रस्ताव को सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया गया है और आगे की कार्रवाई जल्द होगी।

ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग

गाजीपुर जिले के बलिया लोकसभा और मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र में आने वाले कयामपुर छावनी सहित 15 गांवों के लोगों को लंबे समय से पुल की आवश्यकता थी। मगई नदी के कारण यह गांव मुख्य सड़कों से कटे रहते हैं और आने-जाने के लिए नाव या बांस के पुल का सहारा लेना पड़ता है। आजादी के बाद से लेकर अब तक कोई भी सरकार यहां पुल नहीं बनवा सकी, जिससे नाराज ग्रामीणों ने स्वयं निर्माण कार्य शुरू कर दिया।

सेवानिवृत्त सैनिक की पहल से जुटा चंदा

गांव के ही रहने वाले सेवानिवृत्त सैनिक ने इस समस्या का समाधान निकालने की ठानी और अपने रिटायरमेंट फंड से 10 लाख रुपये दान कर पुल निर्माण की नींव रखी। इसके बाद ग्रामीणों ने भी चंदा इकट्ठा कर इस कार्य में सहयोग देना शुरू किया। 25 फरवरी 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने इस पुल का भूमि पूजन और शिलान्यास किया, जिसके बाद निर्माण कार्य तेज़ी से आगे बढ़ा।

अब तक पूरा हो चुका है आधा निर्माण

ग्रामीणों के सहयोग से दो पिलर, दोनों ओर का अप्रोच मार्ग और आधे पुल का स्लैब तैयार हो चुका है। हालांकि, जब इस पुल के निर्माण की खबर मीडिया में आई, तो प्रशासन ने इसकी गुणवत्ता और मानकों की जांच करवाने की बात कही। जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने कहा कि उन्हें इस निर्माण कार्य की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली और PWD की टीम से पुल की जांच करवाई जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह पुल भारी वाहनों के आवागमन के लिए उपयुक्त है या नहीं।

सरकार ने दिया प्रस्ताव पर कार्रवाई का आश्वासन

योगी सरकार के आठ साल पूरे होने के अवसर पर गाजीपुर पहुंचे प्रभारी मंत्री रविंद्र जायसवाल से जब इस पुल के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि पुल निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है और जल्द ही इस पर काम शुरू किया जाएगा। हालांकि, ग्रामीणों की मेहनत से पुल का आधा काम पहले ही पूरा हो चुका है, जिससे यह साफ है कि जनप्रतिनिधियों से उम्मीद छोड़कर स्थानीय लोगों ने खुद ही समाधान निकालने की ठान ली है।

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