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AKTU दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भवन निर्माण की खामियों पर उठाए सवाल

AKTU दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भवन निर्माण की खामियों पर उठाए सवाल

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) के 24वें दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के भवन निर्माण, छात्रावासों की व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकारी धन का उपयोग केवल बजट खर्च करने के लिए नहीं, बल्कि जरूरत और उपयोगिता को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए आनंदीबेन पटेल ने कहा कि कई विश्वविद्यालयों और सरकारी संस्थानों में भवनों का लेआउट इस तरह तैयार किया जाता है कि बड़ी जगह बेकार चली जाती है। उन्होंने कहा कि भवनों की डिजाइन उपयोगिता को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए। उदाहरण देते हुए उन्होंने AKTU के एक सभागार का जिक्र किया, जहां दो कोनों में अधिकारियों के बैठने की व्यवस्था है, जबकि बाकी का बड़ा हिस्सा खाली रहता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आवश्यकता के अनुसार निर्माण क्यों नहीं किया जाता और उपलब्ध स्थान का बेहतर उपयोग क्यों नहीं होता।

राज्यपाल ने भवन निर्माण में योजना की कमी पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि एक भवन का निर्माण पूरा होने के बाद यह पता चला कि वहां बिजली और पानी की व्यवस्था ही नहीं की गई थी, जिसके लिए दोबारा खुदाई करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि ऐसी लापरवाही सरकारी संसाधनों की बर्बादी है और निर्माण कार्य शुरू करने से पहले सभी आवश्यक सुविधाओं की समुचित योजना बनाई जानी चाहिए।

छात्रावासों और शैक्षणिक परिसरों की स्थिति पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कई छात्रावासों में पर्याप्त खिड़कियां नहीं हैं, पुस्तकों के लिए उचित स्थान नहीं बनाया गया है और पानी की टंकियों की देखरेख भी सही तरीके से नहीं होती। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान कुछ स्थानों पर टंकियां खुली मिलीं, जिनमें बंदर उतर जाते थे। वहीं, कक्षाओं में ब्लैकबोर्ड की ऊंचाई भी छात्रों की सुविधा के अनुरूप नहीं थी। उन्होंने कहा कि ऐसी छोटी-छोटी कमियां भी विद्यार्थियों की पढ़ाई और सुरक्षा को प्रभावित करती हैं।

आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालयों के मेस और छात्रावासों की नियमित निगरानी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भोजन की गुणवत्ता, उपयोग किए जाने वाले मसालों और उनकी एक्सपायरी डेट की नियमित जांच होनी चाहिए। परिसर की साफ-सफाई और रखरखाव को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि छात्रों को बेहतर वातावरण मिल सके।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का उल्लेख करते हुए कहा कि कक्षाओं और छात्रावासों का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक कक्षा में निर्धारित संख्या से अधिक छात्र नहीं होने चाहिए और छात्रावासों में भी क्षमता के अनुसार ही व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पुस्तकालय, प्रशासनिक भवन और छात्रावासों की योजना इस प्रकार बनाई जाए कि विद्यार्थियों को अनावश्यक दूरी तय न करनी पड़े।

छात्राओं को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उन्हें पहले शिक्षा और करियर पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जीवन में आत्मनिर्भर बनना सबसे महत्वपूर्ण है और युवाओं को पहले अपने पैरों पर खड़ा होना चाहिए। इसके बाद ही विवाह जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने का आधार है।

दीक्षांत समारोह में कुल 62,537 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई, जबकि 53 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी गई। इसके अलावा 35 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 23 विद्यार्थियों को रजत पदक और 24 विद्यार्थियों को कांस्य पदक से सम्मानित किया गया। गाजियाबाद के अजय कुमार गर्ग इंजीनियरिंग कॉलेज की अंशिका राणा को सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने पर चांसलर मेडल दिया गया, जबकि KIET ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की छात्रा इशिका को कमल रानी वरुण स्मृति स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

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