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अलीगंज अग्निकांड: 15 लोगों की मौत वाली इमारत होगी ध्वस्त

लखनऊ, 11 जुलाई। अलीगंज सेक्टर-डी में बीती 22 जून को भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद विवादों में आई इमारत को ध्वस्त करने का आदेश लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के विहित प्राधिकारी न्यायालय ने जारी कर दिया है। तीन दिन तक चली सुनवाई के बाद शुक्रवार को दिए गए आदेश में भवन […]

अलीगंज अग्निकांड: 15 लोगों की मौत वाली इमारत होगी ध्वस्त

लखनऊ, 11 जुलाई। अलीगंज सेक्टर-डी में बीती 22 जून को भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद विवादों में आई इमारत को ध्वस्त करने का आदेश लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के विहित प्राधिकारी न्यायालय ने जारी कर दिया है। तीन दिन तक चली सुनवाई के बाद शुक्रवार को दिए गए आदेश में भवन को अवैध घोषित करते हुए भवन मालिक को स्वयं 15 दिन के भीतर इसे गिराने का निर्देश दिया गया है। यदि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं की गई तो एलडीए इमारत को ध्वस्त करेगा और उसका पूरा खर्च भवन मालिक से वसूलेगा।

22 जून को अलीगंज स्थित एक एनिमेशन सेंटर संचालित होने वाली इमारत में भीषण आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद हुई जांच में सामने आया कि भवन में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। इसके अलावा निर्माण मानकों का भी गंभीर उल्लंघन किया गया था। जांच में पाया गया कि आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत मानचित्र के विपरीत भवन का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था और कई हिस्सों का निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुरूप नहीं था।

इसी आधार पर एलडीए ने 23 जून को भवन मालिक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। मामले की सुनवाई एलडीए के विहित प्राधिकारी अतुल कुमार की अदालत में तीन दिनों तक चली। अंतिम सुनवाई के बाद न्यायालय ने आदेश सुरक्षित रख लिया था, जिसे शुक्रवार को जारी करते हुए भवन को अवैध घोषित कर ध्वस्तीकरण का आदेश दिया गया। आदेश की प्रति एलडीए की टीम ने मौके पर पहुंचकर भवन पर चस्पा भी कर दी।

भवन मालिक ने मांगा था समय

सुनवाई के दौरान भवन मालिक की ओर से अधिवक्ता ने अवैध निर्माण को स्वयं के खर्च पर हटाने तथा नई भवन निर्माण नीति के तहत शमन मानचित्र (कंपाउंडिंग) की अनुमति देने का अनुरोध किया था। इसके साथ ही एक माह का समय देने की भी मांग की गई थी। हालांकि न्यायालय ने यह मांग स्वीकार नहीं की और केवल 15 दिन के भीतर स्वयं ध्वस्तीकरण का अवसर दिया। यदि इस अवधि में कार्रवाई नहीं होती है तो एलडीए स्वयं भवन गिराएगा।

इन कारणों से भवन घोषित हुआ अवैध

जांच में भवन में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं—

  • आवासीय भवन का मानचित्र स्वीकृत कराकर उसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था।
  • स्वीकृत नक्शे में बेसमेंट सहित केवल दो मंजिल की अनुमति थी, जबकि अवैध रूप से तीसरी मंजिल का निर्माण कर लिया गया।
  • मानचित्र में लगभग 20 वर्गमीटर बेसमेंट स्वीकृत था, जबकि मौके पर करीब 134 वर्गमीटर निर्माण पाया गया।
  • भवन निर्माण में निर्धारित सेटबैक का भी पालन नहीं किया गया था।
  • अग्निशमन सुरक्षा संबंधी आवश्यक मानकों की अनदेखी की गई थी।

सुनवाई का पूरा घटनाक्रम

  • 23 जून: एलडीए ने अवैध निर्माण का नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा।
  • 7 जुलाई: पहली सुनवाई में भवन मालिक के अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।
  • 8 जुलाई: दूसरी सुनवाई में जवाब दाखिल किया गया और बहस के लिए समय लिया गया।
  • 9 जुलाई: दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद आदेश सुरक्षित रखा गया।
  • 10 जुलाई: एलडीए कोर्ट ने भवन ध्वस्त करने का आदेश जारी कर दिया।

अपील का विकल्प रहेगा

एलडीए के आदेश के खिलाफ भवन मालिक पहले मंडलायुक्त के समक्ष अपील कर सकता है। वहां से राहत न मिलने पर शासन में आवास विभाग के सचिव के समक्ष अपील का विकल्प उपलब्ध रहेगा। इसके बाद भी राहत न मिलने की स्थिति में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।

ध्वस्तीकरण पर आएगा लाखों का खर्च

एलडीए अधिकारियों के अनुसार, इमारत को गिराने में लगभग चार से पांच लाख रुपये का खर्च आने का अनुमान है। इसमें मशीनरी, श्रमिक, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक खर्च शामिल होंगे। यदि एलडीए को कार्रवाई करनी पड़ी तो यह पूरी राशि भवन मालिक से वसूली जाएगी।

22 जून को हुए अग्निकांड के बाद यह कार्रवाई अवैध निर्माण और भवन सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के मामलों में प्रशासन की अब तक की सबसे सख्त कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।

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