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चढ़ावा चोरी मामला: एसआईटी की प्रारंभिक जांच में अनिल मिश्रा पर गिरी गाज, चंपत राय का नाम नहीं

अयोध्या, 11 जुलाई। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले की विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को जिम्मेदार ठहराया गया है, जबकि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया है। इसे लेकर विभिन्न स्तरों पर […]

चढ़ावा चोरी मामला: एसआईटी की प्रारंभिक जांच में अनिल मिश्रा पर गिरी गाज, चंपत राय का नाम नहीं

अयोध्या, 11 जुलाई। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले की विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को जिम्मेदार ठहराया गया है, जबकि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया है। इसे लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि ट्रस्ट के प्रशासनिक और प्रबंधन संबंधी निर्णयों में चंपत राय की भूमिका प्रमुख मानी जाती रही है।

सूत्रों के अनुसार, एसआईटी को जांच के दौरान ऐसा कोई दस्तावेज नहीं मिला, जिस पर चंपत राय के हस्ताक्षर हों या जिससे उनकी प्रत्यक्ष प्रशासनिक भूमिका इस प्रकरण में स्थापित होती हो। इसके विपरीत बैंक के साथ हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू), दान राशि की गणना से संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तथा अन्य आधिकारिक अभिलेखों में डॉ. अनिल मिश्रा के हस्ताक्षर मिले। इन्हीं दस्तावेजों को जांच में प्रमुख साक्ष्य माना गया, जिसके आधार पर प्रारंभिक रिपोर्ट में अनिल मिश्रा की जिम्मेदारी तय की गई।

सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट से जुड़े कई प्रशासनिक निर्णयों और वित्तीय प्रक्रियाओं का संचालन व्यवहारिक रूप से चंपत राय के नेतृत्व में होता था, लेकिन उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों में उनका प्रत्यक्ष हस्ताक्षर या लिखित अनुमोदन सामने नहीं आया। इसी कारण प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में उनका नाम शामिल नहीं किया गया। ट्रस्ट के एक अन्य पदाधिकारी गोपाल राव का नाम भी दस्तावेजों में नहीं मिलने के कारण रिपोर्ट में उनका उल्लेख नहीं किया गया है।

हालांकि, जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि एसआईटी की विस्तृत जांच अभी जारी है और अगले कुछ दिनों में इसे अंतिम रूप देकर शासन को सौंपा जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि 15 जुलाई के आसपास प्रस्तुत होने वाली विस्तृत रिपोर्ट में चंपत राय की भूमिका का उल्लेख किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो उन्हें प्रत्यक्ष वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि प्रबंधन की निगरानी और नियंत्रण में कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह भी देखा जा रहा है कि मंदिर में संवेदनशील जिम्मेदारियों के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति किस प्रक्रिया के तहत की गई और क्या निर्धारित नियमों का पालन किया गया। जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि दान पात्रों की चाबियों तक किन-किन लोगों की पहुंच थी और निगरानी व्यवस्था में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई।

इस बीच चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस और एसआईटी की कार्रवाई के बाद मंदिर परिसर में कार्यरत कर्मचारियों में दहशत का माहौल बताया जा रहा है। दान राशि की गणना में लगे कई कर्मचारी पिछले कुछ दिनों से काम पर नहीं आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, जिन कर्मचारियों से पहले पूछताछ की जा चुकी है, उनमें से कई संभावित कार्रवाई की आशंका के चलते कार्यस्थल से दूरी बनाए हुए हैं।

बताया जा रहा है कि बैंक की ओर से नियुक्त सुरक्षा एजेंसी के माध्यम से कुल 46 हाउसकीपिंग कर्मियों को दान राशि की गणना के कार्य में लगाया गया था। इनमें से छह कर्मचारी—अनुकल्प, लवकुश, मनीष, अविनाश, करुणेश और रमाशंकर—को चोरी के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है और उन्हें सेवा से भी हटा दिया गया है। शेष कर्मचारियों में से भी बड़ी संख्या ने पिछले दिनों से काम पर आना बंद कर दिया है। वर्तमान में सीमित संख्या में कर्मियों के माध्यम से दान राशि की गणना का कार्य कराया जा रहा है।

मंदिर से जुड़े एक पदाधिकारी का कहना है कि कई कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ दी है, जबकि संबंधित कंपनी का दावा है कि केवल वे छह कर्मचारी हटाए गए हैं जिन्हें जेल भेजा गया है। अन्य कर्मचारियों की ओर से अब तक कोई औपचारिक इस्तीफा नहीं दिया गया है।

एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि चढ़ावा चोरी प्रकरण में जिम्मेदारी का दायरा किन-किन स्तरों तक तय किया जाता है और किन लोगों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की संस्तुति की जाती है।

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