‘हर चौपाल, हर नुक्कड़ अब जंतर-मंतर’, डिंपल यादव का मोदी सरकार पर हमला
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के फैसले पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि किसी स्थान को प्रदर्शन के लिए प्रतिबंधित या सूची से बाहर करने से लोगों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। डिंपल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जगह बदलने से जन-जागरण नहीं रुकेगा, बल्कि अब हर चौपाल और हर नुक्कड़ लोकतंत्र की आवाज उठाने का केंद्र बनेगा।
डिंपल यादव ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश में कहा कि अगर सरकार को लगता है कि जंतर-मंतर से प्रदर्शन स्थल का दर्जा छीन लेने से आम लोगों की न्याय की आवाज शांत हो जाएगी, तो यह उसकी बड़ी भूल है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को बचाने और जनता के अधिकारों के लिए उठने वाली आवाज किसी एक जगह तक सीमित नहीं है। लोग जहां भी होंगे, वहीं से अपने मुद्दों को उठाएंगे।
सपा सांसद ने वोट चोरी, चंदा चोरी, पेपर लीक, महंगाई, बेरोजगारी, बढ़ते अपराध और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि इन सवालों पर जनता की आवाज लगातार उठती रहेगी। उन्होंने अपने संदेश में चौपाल, नुक्कड़, पगडंडी, सड़क, गांव और घर को लोकतंत्र की लड़ाई का प्रतीक बताते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए आगे आने वाला हर व्यक्ति अब जंतर-मंतर है। उन्होंने अपनी बात को ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ के नारे के साथ समाप्त किया।
दरअसल, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटाकर तीन अन्य स्थानों को प्रदर्शन स्थल के रूप में तय किया है। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड शामिल हैं। इसी फैसले के बाद विपक्षी नेताओं ने सरकार पर सवाल उठाए हैं और प्रदर्शन के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराने की मांग की है।
इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी से जुड़े लोगों के वोट बनवाने में विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। अखिलेश ने कहा कि भाजपा को अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए और चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए। हालांकि, वोट बनवाने में पक्षपात को लेकर लगाए गए ये आरोप विपक्ष की ओर से किए गए दावे हैं।
अखिलेश यादव ने कहा कि केवल प्रदर्शन स्थल बदलने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा। अगर सरकार लोकतंत्र को मजबूत करना चाहती है, तो उसे विरोध-प्रदर्शनों के लिए और अधिक स्थान उपलब्ध कराने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन की जगह बदलने से सरकार की कथित गलतियों को छिपाया नहीं जा सकता और लोकतंत्र के लिए विपक्ष की आवाज उठाने का सिलसिला जारी रहेगा।
जंतर-मंतर को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर विरोध-प्रदर्शन के अधिकार और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस तेज कर दी है। विपक्ष का कहना है कि जनता को अपनी मांगें रखने के लिए पर्याप्त अवसर और स्थान मिलने चाहिए, जबकि इस फैसले को लेकर आगे राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है।