यूपी में MLC की 11 सीटों पर BJP ने झोंकी ताकत, CM योगी से लेकर बड़े नेताओं तक संभाली कमान
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद की 11 सीटों पर होने वाला चुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। पार्टी इस चुनाव को विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल मानकर चल रही है। यही वजह है कि भाजपा ने संगठन से लेकर सरकार तक के नेताओं को चुनावी मैदान में उतार दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्रियों और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों को अलग-अलग क्षेत्रों में जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि सभी सीटों पर पार्टी की स्थिति मजबूत की जा सके।
प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों के चुनाव का दायरा 72 जिलों तक फैला है। ऐसे में भाजपा ने चुनाव को केवल स्थानीय स्तर की लड़ाई मानने के बजाय इसे 2027 की तैयारियों से जोड़ दिया है। पार्टी का लक्ष्य इन सीटों पर बेहतर प्रदर्शन कर संगठन की मजबूती और मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ का आकलन करना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी विभिन्न क्षेत्रों में प्रचार की कमान संभाल रहे हैं, जबकि अन्य वरिष्ठ नेता चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने में जुटे हैं।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और उत्तर प्रदेश के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने भी नेताओं और विधायकों को चुनाव को गंभीरता से लेने का संदेश दिया है। पार्टी नेतृत्व की ओर से संकेत दिया गया है कि एमएलसी चुनाव में विधायकों के क्षेत्र का प्रदर्शन भी उनके राजनीतिक मूल्यांकन का हिस्सा होगा। इससे 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट के दावेदारों के लिए भी यह चुनाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चुनावी तैयारियों को मजबूत करने के लिए भाजपा ने विधायकों, सांसदों और प्रदेश पदाधिकारियों को अलग-अलग जिलों, मंडलों और क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी है। इसके अलावा ब्लॉक स्तर पर भी प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। पार्टी का जोर बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने, मतदाताओं से संपर्क बढ़ाने और चुनावी प्रबंधन को मजबूत बनाने पर है।
भाजपा के लिए यह चुनाव इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसके नतीजों से पार्टी को शिक्षित वर्ग, स्नातकों और शिक्षकों के बीच अपने समर्थन का आकलन करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, चुनावी प्रदर्शन के आधार पर संगठन की तैयारियों और स्थानीय नेताओं की सक्रियता की भी समीक्षा की जा सकती है। ऐसे में 11 एमएलसी सीटों का मुकाबला 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की रणनीति और सांगठनिक ताकत की एक अहम परीक्षा माना जा रहा है।