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बृजभूषण के करीबी भवानी भीख शुक्ला सपा में शामिल, अखिलेश बोले- बढ़ रहा PDA परिवार

बृजभूषण के करीबी भवानी भीख शुक्ला सपा में शामिल, अखिलेश बोले- बढ़ रहा PDA परिवार

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने अपने कुनबे को बढ़ाने की कोशिश तेज कर दी है। गुरुवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े कई नेताओं ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इनमें गोंडा के भवानी भीख शुक्ला भी शामिल रहे, जो अपने पांच बेटों और अन्य परिजनों के साथ सपा में आए। भवानी भीख शुक्ला को बीजेपी सांसद रहे बृजभूषण शरण सिंह का करीबी बताया जाता है। उनके सपा में शामिल होने को चुनाव से पहले पार्टी की राजनीतिक तैयारियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

लखनऊ में आयोजित सदस्यता कार्यक्रम के दौरान समर्थकों ने ‘जय भवानी, जय अखिलेश’ के नारे लगाए। अखिलेश यादव ने भवानी भीख शुक्ला और उनके परिवार का स्वागत करते हुए कहा कि उनका नाम सुनते ही अलग तरह का जोश देखने को मिला। उन्होंने भवानी भीख शुक्ला के पांचों बेटों के नाम भगवान शुक्ला, कृष्ण भगवान शुक्ला, शिव भगवान शुक्ला, विष्णु भगवान शुक्ला और शंकर भगवान शुक्ला का जिक्र करते हुए कहा कि ये नाम सनातनी परंपरा में विशेष महत्व रखते हैं।

इस दौरान अखिलेश यादव ने अपने पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जितना अपमान, दुख और पीड़ा बढ़ रही है, उतना ही पीडीए परिवार भी बढ़ता जा रहा है। अखिलेश ने दावा किया कि पीडीए को रोकने की कोशिश करने वाले सफल नहीं होंगे और यह परिवार लगातार आगे बढ़ेगा। सपा अध्यक्ष के इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के सामाजिक और राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

भवानी भीख शुक्ला के अलावा भी कई नेताओं ने समाजवादी पार्टी का दामन थामा। इनमें मुरादाबाद के पूर्व विधायक राजीव चंदा, मेरठ के विनोद पुरानी, बीजेपी के पिछड़ा वर्ग मोर्चे की प्रदेश कार्यसमिति से जुड़े रहे मनमोहन सैनी और कुंडा से चुनाव लड़ चुके योगेंद्र नाथ मिश्रा शामिल हैं। बाबागंज से पूर्व प्रत्याशी केशव पासी, सीतापुर से पूर्व प्रत्याशी आशीष प्रताप सिंह और नरेश प्रताप सिंह ने भी सपा की सदस्यता ली। इसके अलावा लक्ष्मण सैनी, अंकित गौतम, खुर्जा के चंद्रपाल सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री वीपी मौर्य के पुत्र अक्षय मौर्य, पूर्व मंत्री और बसपा में कोऑर्डिनेटर रहे योगेंद्र यादव तथा मेरठ मंडल में बसपा के कोऑर्डिनेटर रह चुके सुरेंद्र सैनी भी समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। इनमें कई नेता बीजेपी और बहुजन समाज पार्टी से जुड़े रहे हैं।

सदस्यता कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के बीच बीजेपी की स्थिति कमजोर होने पर पार्टी चुनाव आयोग की आड़ ले रही है। अखिलेश ने चुनाव आयोग पर बीजेपी के इशारे पर काम करने और लोकतंत्र तथा संविधान को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। हालांकि, ये आरोप सपा अध्यक्ष की ओर से लगाए गए हैं।

मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाते हुए अखिलेश यादव ने दावा किया कि करीब 19 लाख संदिग्ध या कथित फर्जी वोटरों का मामला सामने आया है। उनके मुताबिक, 16 लाख 18 हजार मतदाताओं के अलावा करीब तीन लाख अन्य कथित फर्जी वोटरों से जुड़े मामले भी सामने आए हैं। उन्होंने लोनी, साहिबाबाद, महरौनी, दादरी और ललितपुर समेत कई क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए मतदाता सूची में गड़बड़ियों की शिकायतें होने की बात कही।

अखिलेश यादव ने मुरादाबाद नगर विधानसभा सीट का उदाहरण देते हुए दावा किया कि समाजवादी पार्टी 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां केवल 782 वोटों से हार गई थी, जबकि अब वहां 8,373 फर्जी वोट जोड़े जाने का आरोप है। उन्होंने यह भी कहा कि सपा ने करीब 100 विधानसभा क्षेत्रों में डबल वोट और मतदाता सूची से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर शिकायतें की हैं। अखिलेश ने आरोप लगाया कि जिन सीटों पर बीजेपी को हार का डर है, वहां मतदाताओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इन आंकड़ों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

बीजेपी पर चुनाव जीतने के लिए कथित तौर पर अलग-अलग हथकंडे अपनाने का आरोप लगाते हुए अखिलेश यादव ने नकली वोट डलवाने, असली मतदाताओं के नाम कटवाने, मतदाताओं को डराने और ईवीएम में गड़बड़ी कराने जैसे आरोप लगाए। उन्होंने फर्जी मतगणना, नतीजों में हेरफेर और चुनाव के बाद विपक्षी दलों में टूट कराने की कोशिशों का भी जिक्र किया। इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने अपने राजनीतिक दावे रखे।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी अखिलेश यादव ने अपना रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद भी मुख्य चुनाव आयुक्त को इस्तीफा दे देना चाहिए। अखिलेश ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में मार्च निकालना और धरना देना राजनीतिक दलों का अधिकार है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस के नोटिस पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक लोग जहां बैठ जाते हैं, वही जगह जंतर-मंतर बन जाती है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी में नेताओं के शामिल होने का यह सिलसिला पार्टी के संगठन को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। एक ओर अखिलेश यादव पीडीए के विस्तार का दावा कर रहे हैं, तो दूसरी ओर मतदाता सूची और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर बीजेपी पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। अब देखना होगा कि दूसरे दलों से आए नेताओं का सपा को आगामी चुनाव में कितना राजनीतिक लाभ मिलता है।

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