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ज्ञानवापी विवाद में समझौते की कोशिश नाकाम, सात मिनट में खत्म हुई मध्यस्थता; दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पर कायम

वाराणसी, 14 जुलाई। ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी विवाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मंगलवार को वाराणसी के सिविल कोर्ट स्थित मेडिएशन सेंटर में हुई मध्यस्थता की प्रक्रिया महज सात मिनट में समाप्त हो गई। दोनों पक्षों ने आपसी समझौते से विवाद सुलझाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद मध्यस्थता की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। […]

ज्ञानवापी विवाद में समझौते की कोशिश नाकाम, सात मिनट में खत्म हुई मध्यस्थता; दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पर कायम

वाराणसी, 14 जुलाई। ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी विवाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मंगलवार को वाराणसी के सिविल कोर्ट स्थित मेडिएशन सेंटर में हुई मध्यस्थता की प्रक्रिया महज सात मिनट में समाप्त हो गई। दोनों पक्षों ने आपसी समझौते से विवाद सुलझाने से इनकार कर दिया, जिसके बाद मध्यस्थता की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब मामले की सुनवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे जारी रहेगी।

दोपहर करीब दो बजे जिला जज मुकुल आनंद पांडेय की मौजूदगी में दोनों पक्षों को मध्यस्थता के लिए बुलाया गया। सबसे पहले अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी से पूछा गया कि क्या वह मध्यस्थता के जरिए विवाद का समाधान चाहती है। कमेटी की ओर से स्पष्ट रूप से कहा गया कि वह समझौते के लिए तैयार नहीं है। इसके बाद हिंदू पक्ष से राय ली गई, जिसने भी मध्यस्थता से इनकार कर दिया। दोनों पक्षों के रुख के बाद बैठक समाप्त हो गई और पूरी प्रक्रिया करीब सात मिनट में खत्म हो गई।

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में सभी पक्षों को नोटिस जारी कर 14 जुलाई को सिविल कोर्ट के मेडिएशन सेंटर में उपस्थित होकर विवाद के समाधान की संभावना तलाशने का निर्देश दिया था। इसी क्रम में दोनों पक्षों के प्रतिनिधि और अधिवक्ता अदालत पहुंचे।

दोपहर 1:36 बजे अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता मेडिएशन सेंटर पहुंचे। इसके बाद करीब 1:55 बजे श्रृंगार गौरी मामले की वादिनी रेखा पाठक, लक्ष्मी देवी, सीता और मंजू व्यास अपने अधिवक्ताओं सुधीर त्रिपाठी और सुभाष नंदन के साथ वहां पहुंचीं। सुनवाई के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे और अदालत परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा।

सुनवाई से पहले ही दोनों पक्षों के मध्य समझौते की संभावना बेहद कम मानी जा रही थी। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने एक दिन पहले ही पत्र जारी कर स्पष्ट कर दिया था कि वह मध्यस्थता प्रक्रिया में विवाद के समाधान के पक्ष में नहीं है। वहीं, हिंदू पक्ष भी अपने दावे पर कायम था।

राज्य सरकार की ओर से नियुक्त स्पेशल काउंसिल राजेश मिश्र ने बताया कि प्री-मेडिएशन प्रक्रिया के तहत दोनों पक्षों और शासन के अधिवक्ताओं को बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने स्पष्ट कर दिया कि समझौते की कोई संभावना नहीं है। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह मस्जिद है और मस्जिद ही रहेगी, जबकि हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मंदिर है और इसे मंदिर के रूप में उपयोग में लाया जाना चाहिए। अब इस विवाद का समाधान न्यायालय के निर्णय से ही होगा।

अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता एखलाक अहमद ने कहा कि न्यायिक अधिकारी ने दोनों पक्षों से पूछा था कि क्या मध्यस्थता के माध्यम से विवाद का समाधान संभव है, लेकिन दोनों पक्षों ने इससे इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अब जो भी निर्णय उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय करेगा, उसे स्वीकार किया जाएगा।

हिंदू पक्ष के अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने कहा कि उनके पक्ष का रुख पहले से स्पष्ट है। उनका कहना है कि न्यायालय द्वारा कराए गए सर्वेक्षण और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट में मंदिर से जुड़े अवशेष मिलने का उल्लेख है। इसलिए उनका पक्ष अपने दावे पर कायम है और अब अंतिम निर्णय न्यायालय से ही अपेक्षित है।

ज्ञानवापी विवाद देश के सबसे संवेदनशील धार्मिक एवं कानूनी मामलों में शामिल है। मंगलवार की असफल मध्यस्थता के बाद अब सभी की निगाहें न्यायालय की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।

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