Global Handwashing Day 2025: एक घंटे में कितनी बार धोएं हाथ? जानिए सही तरीका और जरूरी रहस्य ताकि बीमारियों से रहे बचाव l
हर साल 15 अक्टूबर को विश्वभर में ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे मनाया जाता है। यह दिन हाथ धोने की महत्ता को विश्व स्तर पर प्रचारित करने के लिए समर्पित है। 2025 में इस दिन का थीम है “Be a Handwashing Hero,” जिसका मकसद हर व्यक्ति को हाथ धोने की आदत को अपना सुपरपावर बनाना है।
हाथ धोना एक बेहद सरल, किफायती और असरदार तरीका है जिससे हम सर्दी-जुकाम, डायरिया, विषाणु संक्रमण, और कई अन्य संक्रामक बीमारियों से बच सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, सिर्फ साबुन और साफ पानी से हाथ धोने से सांस और पेट संबंधी बीमारियों में 25-50% तक कमी आ सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हाथ धोने की आवृत्ति इस बात पर निर्भर करती है कि आप क्या कर रहे हैं। आमतौर पर एक घंटे में 2 से 4 बार हाथ धोना पर्याप्त माना जाता है, जबकि जरूरी क्षणों पर जैसे कि खाने से पहले, टॉयलेट के बाद, खांसते-छीकते समय, और बाहर से घर आते वक्त हाथ धोना अनिवार्य है।
बार-बार हाथ धोने से हाथों की त्वचा भी प्रभावित हो सकती है, इसलिए सही संतुलन जरूरी है। हल्के साबुन और गुनगुने पानी से धोना सबसे अच्छा रहता है। यदि साबुन उपलब्ध न हो तो अल्कोहल आधारित हैंड सैनेटाइजर भी उपयोगी हैं।
सही तरीके से हाथ धोने के पांच कदम
साबुन लगाएं और अच्छी तरह हाथों पर मलें।
हथेलियों, उंगलियों के बीच, नाखूनों के नीचे साफ करें।
कम से कम 20 सेकंड तक मलते रहें।
साफ पानी से हाथ धोएं।
साफ तौलिए से सुखाएं या हवा में सूखने दें।
2008 में शुरू हुए ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे के पीछे का मकसद हर समाज में हाथ धोने की संस्कृति को बढ़ावा देना है। पिछले 17 वर्षों में यह दिवस 100 से अधिक देशों में मनाया जाता है। इसमें स्कूल, अस्पताल, समुदाय, और कार्यस्थल पर जागरूकता अभियानों के माध्यम से सही हाथ धोने के व्यवहार को बढ़ावा दिया जाता है।
यूनीसेफ, WHO जैसी संस्थाएं इसका समर्थन करती हैं और पूरी दुनिया में स्वच्छता, स्वास्थ्य, और बचाव के लिए कई अभियान चलाती हैं। भारत में स्वच्छ भारत मिशन के तहत भी इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
संक्रमण फैलाने वाले जीवाणु और वायरस अक्सर गंदे हाथों से फैलते हैं। टॉयलेट उपयोग के बाद, खाना खाने से पहले, छींकने या खांसने के बाद हाथ धोने से संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाता है। खासकर बच्चों और कमजोर स्वास्थ्य वर्ग के लिए यह आदत जीवनरक्षक साबित हो सकती है।
इसलिए ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे हर व्यक्ति को याद दिलाता है कि हाथ धोना एक सरल लेकिन शक्तिशाली उपाय है, जिससे वह अपनी और अपने परिवार की रक्षा कर सकता है।