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इटावा कथावाचक विवाद: जाति नहीं, महिलाओं से दुर्व्यवहार बना असल कारण, जांच में नया मोड़

इटावा कथावाचक विवाद: जाति नहीं, महिलाओं से दुर्व्यवहार बना असल कारण, जांच में नया मोड़

उत्तर प्रदेश के इटावा ज़िले के दादरपुर गांव में यादव समाज के कथावाचक मुकुट मणि और उनके सहयोगी संत सिंह व्यास पर हुई मारपीट की घटना ने अब नया रुख ले लिया है। पहले इस मामले को कथावाचकों की जाति से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन ताज़ा जानकारी के अनुसार, विवाद की असली वजह कथावाचकों द्वारा कथित रूप से महिलाओं के साथ की गई अभद्रता बताई जा रही है। 21 जून को मुकुट मणि और संत सिंह गांव में कथा करने पहुंचे थे। अगले दिन रात में उनके साथ मारपीट की गई। शुरुआत में इसे जातिगत दुर्व्यवहार का मामला माना गया और चार लोगों की गिरफ्तारी भी हुई। लेकिन अब स्थानीय लोगों और ब्राह्मण महासभा के बयानों के बाद तस्वीर बदलती दिख रही है। ब्राह्मण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण दुबे के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मिलकर कथावाचकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप है कि कथावाचकों ने अपनी जाति छुपाई, धार्मिक भावना भड़काई और महिलाओं के साथ अनुचित व्यवहार किया। हालांकि अभी तक इस मामले में कोई लिखित तहरीर नहीं दी गई है।
महिला रेनू तिवारी ने कथावाचकों पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने कथा के दौरान उनके साथ अनुचित व्यवहार किया। कथावाचकों के झोले से मिले आधार कार्ड में “अग्निहोत्री” उपनाम होने पर उनकी जाति पर संदेह हुआ। साथ ही उन्होंने कहा कि कथा जानबूझकर खराब की गई। सपा जिलाध्यक्ष प्रदीप शाक्य ने महासभा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यदि कथावाचकों के खिलाफ पहले से कोई आपत्ति थी, तो पहले शिकायत क्यों नहीं दी गई? उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कथावाचकों के साथ गलत हुआ तो सपा भी आंदोलन करेगी। एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। अब तक किसी भी पक्ष से लिखित शिकायत नहीं मिली है, लेकिन सभी की बातें सुनी गई हैं। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जैसे-जैसे महिलाओं के साथ बदसलूकी की बात सामने आई, सोशल मीडिया पर लोगों की राय बदलती दिख रही है। कई लोग अब कह रहे हैं कि यदि कथावाचक ने ऐसा किया है, तो उनके साथ जो हुआ, वह गलत नहीं है। इटावा का यह मामला अब सिर्फ जातिगत विवाद नहीं रहा, बल्कि महिलाओं की गरिमा से जुड़ा मुद्दा बन गया है। पुलिस की निष्पक्ष जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट है कि समाज की संवेदनाओं के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी पक्ष को बख्शा नहीं जाना चाहिए।

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