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एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी खत्म, किसानों और तेल कंपनियों को बड़ा फायदा

एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी खत्म, किसानों और तेल कंपनियों को बड़ा फायदा

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने एथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 22 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E22, E25, E27 और E30) पर केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी समाप्त करने का फैसला किया है। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से देश में जैव ईंधन (बायोफ्यूल) के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

सरकार के इस फैसले का सीधा लाभ एथेनॉल उत्पादन से जुड़े उद्योगों, तेल विपणन कंपनियों और किसानों को मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से चीनी मिलों, डिस्टिलरी इकाइयों और एथेनॉल निर्माण में सक्रिय कंपनियों के लिए यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन की मांग बढ़ने से इन क्षेत्रों में निवेश और उत्पादन को नई गति मिलने की संभावना है।

इस फैसले का फायदा किसानों को भी मिल सकता है। एथेनॉल उत्पादन में मुख्य रूप से गन्ना और मक्का जैसे कृषि उत्पादों का उपयोग किया जाता है। ऐसे में एथेनॉल की मांग बढ़ने से इन फसलों की खपत बढ़ेगी, जिससे किसानों की आय में सुधार होने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कृषि क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया सहारा मिलेगा।

भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातक देशों में शामिल है। ऐसे में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने की रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी सीमित किया जा सकेगा। सरकार का यह कदम E20 कार्यक्रम से आगे बढ़कर E30 ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

हालांकि सरकार ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में किसी तत्काल कमी की घोषणा नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय में यह फैसला ईंधन लागत को नियंत्रित करने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने में मददगार साबित हो सकता है। इसके अलावा तेल कंपनियों पर बढ़ते लागत दबाव को भी कम करने में यह कदम उपयोगी माना जा रहा है।

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, एथेनॉल आधारित ईंधन के व्यापक उपयोग से पर्यावरणीय लाभ भी मिलेंगे। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भारत के प्रयासों को मजबूती मिलेगी। सरकार का यह निर्णय आत्मनिर्भर भारत और हरित ऊर्जा के लक्ष्य को आगे बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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