नेपाल से छोड़े गये पानी के चलते सरयू नदी की जलप्रलय, नाव पर ही जल रहा बाढ़ पीड़ितों का चूल्हा
बाराबंकी – नेपाल से छोड़े जा रहा पानी बाराबंकी जिले के तराई क्षेत्र में कहर बरपा रहा है। उफनाई सरयू तीन तहसील क्षेत्रों के सैकड़ों गांवों में कहर बरपा रही है। लोगों के घरों में कई फिट तक पानी भरने से हजारों की आबादी संकट में है। लोग अपने-अपने घरों को छोड़कर तटबंध पर शरण ले रहे हैं। वहीं इस बीच बाढ़ के पानी की चपेट में आने से कई गावों के संपर्क मार्ग बह गया। इससे उन रास्तों से गांव के लोगों का आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है। चारों तरफ बाढ़ ने ऐसा हाहाकार मचा रखा है कि कई गावों में तो लोग नाव पर ही अपनी जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि महिलाएं नाव के ऊपर ही किसी तरह चूल्हा जलाकर अपना और अपने परिवार का पेट भर रही हैं।
– सरयू नदी का पानी खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर पहुंच गया है। लोगों के मुताबिक इस साल नदी का सबसे ज्यादा जलस्तर है। बाढ़ के पानी से घिरे लोगों को नावें नहीं मिल पा रही हैं। इससे तमाम लोग मकान की छतों पर डेरा डाले हुए हैं। ऐसे लोगों का गांव से बाहर निकल पाना मुश्किल हो रहा है। मकान गिरने की आशंका के चलते कई परिवार गहरे पानी के बीच से तटबंध पर पहुंच रहे हैं। हालांकि नदी का जलस्तर बढ़ने की सूचना पर बाराबंकी जिला प्रशासन के अघिकारी मौके पह पहुंचकर लोगों को हर संभव मदद का आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन ग्रामीण लगातार प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं।
– आलम ये है कि घरों में डबाडब पानी भरने के चलते महिलाएं अपनी ग्रहस्थी का सारा सामन लेकर नांव पर चली आई हैं और बाढ़ पीड़ित महिलाएं नाव पर ही चूल्हा जलाकर गीली लकड़ियों से किसी तरह भोजन बना रही हैं और अपने परिवार के लिए दो रोटी का जुगाड़ कर रही हैं। हालांकि इसमें खतरा भी काफी है लेकिन उनका कहना है कि इसके अलावा उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है। बाढ़ पीड़ितों को नहीं पता कि सरयू की इस विनाशलीला का अभी और कितने दिनों तक उन्हें सामना करना पड़ेगा।