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परमाणु ऊर्जा कानूनों में संशोधन की तैयारी, केंद्र सरकार का बड़ा कदम

परमाणु ऊर्जा कानूनों में संशोधन की तैयारी, केंद्र सरकार का बड़ा कदम

भारत सरकार ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलावों की तैयारी शुरू कर दी है। केंद्र अब मौजूदा परमाणु कानूनों में संशोधन करने पर विचार कर रही है ताकि इस क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी को बढ़ाया जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करना है।

सूत्रों के अनुसार, इसके लिए ‘एटॉमिक एनर्जी एक्ट’ में बदलाव के साथ-साथ ‘सिविल लायबिलिटी फॉर न्यूक्लियर डैमेज एक्ट, 2010’ में भी संशोधन किया जाएगा, जिससे न्यूक्लियर उपकरणों की आपूर्ति करने वाली कंपनियों की जिम्मेदारी कम हो सके। इन बदलावों के तहत निजी क्षेत्र के लिए अधिक अनुकूल माहौल तैयार किया जा रहा है।

सरकार इसके साथ ही नियामकीय ढांचे को सरल करने की दिशा में भी काम कर रही है। ‘इनस्पेस’ जैसे मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है, जिसने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित किया है। गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020 में न्यूक्लियर सेक्टर को खोलने की घोषणा की थी, जो अब तक केवल सार्वजनिक क्षेत्र तक सीमित था।

वर्तमान में भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (NPCIL) देश के परमाणु संयंत्रों का संचालन करता है, जिनसे लगभग 8.7 गीगावाट बिजली मिलती है। सरकार ने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) के विकास के लिए 20,000 करोड़ रुपये के खर्च के साथ एक विशेष मिशन शुरू किया है और 2033 तक 5 स्वदेशी SMR चालू करने का लक्ष्य है।

परमाणु ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि इस पहल का उद्देश्य न केवल निजी निवेश को आकर्षित करना है बल्कि परमाणु ऊर्जा उत्पादन को बड़े स्तर पर बढ़ाकर देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना भी है। भारत को 2008 में न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप से मिली छूट के बाद से कई विदेशी कंपनियों ने भी भारत में संयंत्र लगाने में रुचि दिखाई थी। हालांकि, 2010 का नागरिक दायित्व अधिनियम उनकी भागीदारी में एक बड़ी रुकावट बन गया था।

अब सरकार को उम्मीद है कि कानूनी संशोधनों और बेहतर वित्तीय मॉडल के माध्यम से निजी निवेश को फिर से आकर्षित किया जा सकेगा। बताया गया है कि 2047 तक निर्धारित 100 गीगावाट उत्पादन लक्ष्य का लगभग 50% हिस्सा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से आएगा।

एक संसदीय समिति ने भी इस दिशा में जरूरी बदलावों की सिफारिश की है, जिसमें घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकारी गारंटी, वित्तीय सहायता (Viability Gap Funding) और प्रोत्साहनों की व्यवस्था शामिल है। साथ ही समिति ने न्यूक्लियर एक्ट और सिविल लायबिलिटी एक्ट में त्वरित विधायी संशोधनों की अनुशंसा भी की है।

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