भारत के 45 करोड़ लोग खतरे में! नई रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
पिछले 10-15 वर्षों में लोगों की जीवनशैली में आए बदलाव के कारण बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ा है। अस्वस्थ खानपान, खासकर फास्ट फूड की बढ़ती लत के चलते हृदय रोग, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और मोटापे जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। अब द लैंसेट की एक नई रिपोर्ट ने चिंता बढ़ाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अगर यही हाल रहा तो वर्ष 2050 तक भारत में 25 वर्ष से अधिक उम्र के करीब 450 मिलियन (यानी 45 करोड़) लोग मोटापे या अधिक वजन की समस्या से जूझ सकते हैं।
चीन और अमेरिका भी लिस्ट में शामिल
इस रिपोर्ट के अनुसार, मोटापे के मामले में चीन सबसे आगे होगा, जहां 2050 तक 627 मिलियन से ज्यादा लोग मोटापे से प्रभावित होंगे। वहीं, अमेरिका में यह संख्या 214 मिलियन तक पहुंचने की संभावना है। अगर वैश्विक स्तर पर देखा जाए तो 2050 तक दुनिया भर में 3.8 बिलियन से अधिक लोग मोटापे की चपेट में आ सकते हैं। यह आंकड़ा उस समय की कुल युवाओं की आबादी के आधे से भी ज्यादा होगा। इनमें से 1.95 बिलियन लोग गंभीर रूप से मोटे हो सकते हैं। खासकर उप-सहारा अफ्रीका के सुपर एरिया में मोटापे के मामलों में 254.8 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि होने का अनुमान लगाया गया है।
महिलाएं या पुरुष – कौन ज्यादा मोटापे का शिकार?
अगर साल 2021 के आंकड़ों को देखें तो दुनिया भर में 2.11 बिलियन युवा मोटापे या अधिक वजन की समस्या से जूझ रहे थे। इनमें से 1 बिलियन पुरुष और 1.11 बिलियन महिलाएं शामिल थीं। चीन में 402 मिलियन, भारत में 180 मिलियन, और अमेरिका में 172 मिलियन लोग मोटापे की समस्या से प्रभावित पाए गए थे।
भारत, चीन और अमेरिका में मोटापे का बढ़ता खतरा
रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन, भारत और अमेरिका उन देशों में शामिल हैं, जहां मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। लेकिन इसके अलावा ब्राजील, रूस, मैक्सिको, इंडोनेशिया और मिस्र जैसे देशों में भी आधी से ज्यादा आबादी मोटापे की ओर बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका सबसे बड़ा कारण फास्ट फूड है, जो तेजी से लोगों की लाइफस्टाइल का हिस्सा बनता जा रहा है।
मोटापे का सबसे बड़ा कारण – प्रोसेस्ड और फास्ट फूड
भारत समेत कई देशों में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और ड्रिंक्स की खपत तेजी से बढ़ी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत, कैमरून और वियतनाम ऐसे देश हैं, जहां 2009 से 2019 के बीच प्रति व्यक्ति फास्ट फूड और प्रोसेस्ड ड्रिंक्स की बिक्री में सबसे अधिक वार्षिक वृद्धि देखी गई। यही कारण है कि इन देशों में मोटापा तेजी से फैल रहा है। अगर जल्द ही इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में यह एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन सकता है।