मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग न्यूज़
तरुण तेजपाल को बड़ा झटका! यौन उत्पीड़न केस में हाईकोर्ट ने ठहराया दोषी भगवंत सरकार कैबिनेट ने ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) विधेयक-2026’ सहित कई जनहित के कार्यों को दी मंजूरी ‘क्या हमारी कीमत कीड़े-मकौड़ों से भी कम है?’ झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों का फूटा गुस्सा किसी का कान फटा, किसी का कंधा खिसका’—एअर इंडिया फ्लाइट के यात्रियों ने सुनाई दहला देने वाली आपबीती हवा में हड़कंप! टर्बुलेंस में फंसी एअर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट, कई यात्री घायल पटना में बनेगा PM मोदी का मंदिर, बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड की बैठक में बड़ा फैसला CM योगी का बड़ा लक्ष्य, इस बार 5 करोड़ घरों पर फहराएगा तिरंगा भगवा वेश में प्रदर्शन पड़ा भारी! राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ केस दर्ज उमर खालिद की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को हाई कोर्ट का नोटिस SCO समिट के लिए पीएम मोदी को न्योता भेजने की तैयारी में पाकिस्तान, क्या इस्लामाबाद जाएंगे प्रधानमंत्री?

हीमोफीलिया के लिए कोई इलाज नहीं, इसे सिर्फ कंट्रोल किया जा सकता है

हीमोफीलिया के लिए कोई इलाज नहीं, इसे सिर्फ कंट्रोल किया जा सकता है

हीमोफीलिया एक दुर्लभ रक्त विकार है जिसमें शरीर में खून का थक्का नहीं बनता, जिससे सामान्य चोट लगने पर भी खून बहता रहता है। आमतौर पर जब हमें चोट लगती है तो शरीर में ब्लड क्लॉट बनने लगता है जिससे खून बहना बंद हो जाता है, लेकिन हीमोफीलिया से पीड़ित व्यक्ति में यह प्रक्रिया ठीक से नहीं हो पाती। इसके कारण मामूली चोट भी गंभीर ब्लीडिंग का कारण बन सकती है। अधिक खून बहने से चक्कर आना, जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

हीमोफीलिया के प्रकार:

हीमोफीलिया मुख्यतः दो प्रकार का होता है – टाइप ए और टाइप बी।

  • हीमोफीलिया ए : यह ज्यादा सामान्य है और यह F8 जीन में गड़बड़ी के कारण होता है।
  • हीमोफीलिया बी : यह F9 जीन में म्यूटेशन से होता है।
    दोनों ही प्रकार में शरीर में ब्लड क्लॉटिंग फैक्टर (VIII या IX) की कमी होती है। यह एक आनुवंशिक रोग है और इसे पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन सही इलाज से इसे नियंत्रित जरूर किया जा सकता है।

हीमोफीलिया के कारण:

जब शरीर में ब्लड क्लॉटिंग के लिए आवश्यक प्रोटीन की कमी हो जाती है, तब हीमोफीलिया की स्थिति उत्पन्न होती है।
क्लॉटिंग फैक्टर VIII और IX की कमी, इस बीमारी की गंभीरता को निर्धारित करती है। यदि ये फैक्टर बहुत कम हो जाएं, तो बिना चोट के भी खून बहने लगता है।

हीमोफीलिया के लक्षण:

हीमोफीलिया के लक्षण स्पष्ट नहीं होते जब तक कोई चोट न लगे, लेकिन इसके कुछ सामान्य संकेत हैं:

  • जोड़ों में दर्द और सूजन: खून के बहने से जोड़ों में दर्द, सूजन और जकड़न आ सकती है।
  • मांसपेशियों में ब्लीडिंग: मसल्स में खून भर जाने से सूजन, दर्द और कमजोरी हो सकती है।
  • जोड़ों और दिमाग में ब्लीडिंग: जोड़ों में बार-बार खून बहने से हेमार्थ्रोसिस हो सकता है, और ब्रेन में ब्लीडिंग की स्थिति इमरजेंसी होती है, जो लकवे तक का कारण बन सकती है।
  • पाचन तंत्र में ब्लीडिंग: इससे काले रंग का मल या खून की उल्टी हो सकती है, पेट में दर्द और सूजन भी दिख सकती है।
  • नाक से बार-बार खून आना: इससे शरीर में खून की कमी हो सकती है जिससे एनीमिया हो सकता है।
  • आसानी से चोट लगना: शरीर पर लाल या नीले रंग के निशान आ जाते हैं, जो स्किन के अंदर ब्लीडिंग की वजह से होते हैं।

हीमोफीलिया का इलाज संभव नहीं है लेकिन इसे जीवनशैली में बदलाव, सावधानी और मेडिकल मैनेजमेंट से नियंत्रित किया जा सकता है। समय पर डायग्नोसिस और इलाज से रोगी सामान्य जीवन जी सकता है।

Share This
अगला लेख → अगर आपके शरीर में ये बदलाव दिख रहे हैं, तो लिवर की जांच जरूर…

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *

बाज़ार
सेंसेक्स 78,321 -178 (-0.23%)
निफ्टी 24,538 -33 (-0.13%)
मौसम
26°C
Patchy rain nearby
💧 88% 💨 4 km/h
Dehradun