योगी सरकार का बड़ा ग्लोबल दांव, UPITS 2026 में 85 देशों के खरीदारों से जुड़ेंगे यूपी के उद्यमी
उत्तर प्रदेश में स्थानीय उत्पादों, छोटे उद्योगों और नए कारोबार को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) 2026 का चौथा संस्करण 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित किया जा रहा है। पांच दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के उत्पादों के साथ उद्योग, स्टार्टअप, निर्यात और निवेश से जुड़े कारोबारी प्रतिनिधियों की भागीदारी देखने को मिलेगी।
UPITS को उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के बड़े मंच के तौर पर विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल उत्पादों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के उद्यमियों को संभावित खरीदारों, निवेशकों और कारोबारी साझेदारों से जोड़ना भी है। इसके तहत बी2बी बैठकों, कारोबारी संवाद, नीति संबंधी चर्चाओं और निवेश की संभावनाओं पर भी जोर दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ के विजन को उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने MSME, ODOP और स्टार्टअप के माध्यम से आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। इसी सोच के तहत राज्य के अलग-अलग जिलों की स्थानीय आर्थिक पहचान को बड़े बाजार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में MSME क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार के मुताबिक प्रदेश में करीब एक करोड़ MSME इकाइयां हैं, जिनसे लगभग चार करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है। इन छोटे और मध्यम उद्यमों को राष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना राज्य की आर्थिक क्षमता को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसी कड़ी में एक जिला, एक उत्पाद (ODOP) योजना भी अहम भूमिका निभाती है। बनारस के वस्त्र, मुरादाबाद के पीतल उत्पाद, भदोही के कालीन, कन्नौज का इत्र, फिरोजाबाद का कांच, सहारनपुर की लकड़ी की नक्काशी, आगरा का फुटवियर और लखनऊ की चिकनकारी जैसे उत्पादों को उनके स्थानीय क्षेत्र की पहचान के साथ वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
UPITS के पिछले संस्करणों में भी अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की भागीदारी रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 2025 में आयोजित तीसरे संस्करण में करीब 80 देशों से अंतरराष्ट्रीय खरीदार पहुंचे थे, जबकि 2026 के चौथे संस्करण में यह संख्या बढ़कर 85 देशों तक पहुंचने की बात कही गई है। इससे आयोजन के अंतरराष्ट्रीय कारोबारी स्वरूप के विस्तार का संकेत मिलता है।
हालांकि, स्थानीय उत्पाद को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना केवल एक प्रदर्शनी आयोजित करने से संभव नहीं है। इसके लिए उत्पाद की गुणवत्ता, प्रमाणन, पर्यावरण और श्रम मानकों का पालन, समय पर आपूर्ति, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों की जानकारी जैसी कई जरूरतें पूरी करनी होती हैं। छोटे उद्यमियों को इन प्रक्रियाओं के लिए तैयार करना भी वैश्विक व्यापार में उनकी भागीदारी बढ़ाने का अहम हिस्सा है।
UPITS का दायरा पारंपरिक हस्तशिल्प और औद्योगिक उत्पादों तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश में काम कर रहा कोई टेक स्टार्टअप, छोटे शहर की फूड-प्रोसेसिंग यूनिट, एग्रीटेक समाधान विकसित करने वाला युवा उद्यमी या किसी कस्बे की इंजीनियरिंग इकाई भी ‘लोकल’ अर्थव्यवस्था का हिस्सा है। ऐसे उद्यमों को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर राज्य के कारोबार का दायरा और बढ़ सकता है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में बड़े उद्योगों और बड़े निवेश के साथ छोटे एवं मध्यम उद्यमों की उत्पादकता और निर्यात क्षमता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है। इसी वजह से MSME, ODOP, स्टार्टअप और पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़ने वाले मंचों की भूमिका बढ़ जाती है।
ग्रेटर नोएडा में आयोजित हो रहा UPITS 2026 इसी व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा है। पांच दिनों के दौरान होने वाली कारोबारी बैठकों, उत्पाद प्रदर्शन, निवेश संवाद और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की भागीदारी से उत्तर प्रदेश के उद्यमियों को नए बाजार और कारोबारी साझेदार तलाशने का अवसर मिलेगा। ऐसे में UPITS को केवल एक ट्रेड शो के बजाय उत्तर प्रदेश के ‘लोकल टू ग्लोबल’ सफर के एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है।