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China Nuclear Breakthrough: चीन ने थोरियम से बनाया यूरेनियम, बदल जाएगी दुनिया की ऊर्जा नीति

China Nuclear Breakthrough: चीन ने थोरियम से बनाया यूरेनियम, बदल जाएगी दुनिया की ऊर्जा नीति

चीन ने विज्ञान की दुनिया में एक बड़ा इतिहास रच दिया है। उसने थोरियम को यूरेनियम में बदलने की जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह खोज न केवल ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ परमाणु ऊर्जा का रास्ता भी खोल सकती है। चीन ने यह उपलब्धि गोबी रेगिस्तान में स्थित वुवेई के दो मेगावॉट थोरियम मॉल्टन-सॉल्ट रिएक्टर (TMSR-LF1) में हासिल की है। इस रिएक्टर में थोरियम को यूरेनियम में बदलने का पहला चरण पूरा कर लिया गया है, जिससे वैज्ञानिक समुदाय में उत्साह और आश्चर्य दोनों का माहौल है।

थोरियम-232 खुद से विखंडन नहीं करता, यानी यह सीधे ऊर्जा उत्पन्न नहीं करता। इसे पहले यूरेनियम-233 में बदलना पड़ता है, जो एक विभाज्य नाभिक है। इसके लिए थोरियम पर न्यूट्रॉनों की बौछार की जाती है। इससे यह थोरियम-233 बनता है, जो आगे बीटा क्षय से प्रोटैक्टिनियम-233 और फिर यूरेनियम-233 में बदल जाता है। यह प्रक्रिया लगातार रिएक्टर के अंदर चलती रहती है और इसी से भारी मात्रा में ऊर्जा पैदा होती है। खास बात यह है कि एक बार प्रक्रिया शुरू होने के बाद ईंधन का बड़ा हिस्सा खुद रिएक्टर के अंदर ही बनता रहता है, जिससे यह प्रणाली लंबे समय तक चल सकती है और बाहरी यूरेनियम की जरूरत बहुत कम पड़ती है।

थोरियम से यूरेनियम बनाने की यह खोज नई नहीं है। इस पर काम लगभग 85 साल पहले शुरू हुआ था। 1940 के दशक में अमेरिका के ओक रिज नेशनल लेबोरेटरी में वैज्ञानिक अल्विन वाइनबर्ग ने मॉल्टन-सॉल्ट रिएक्टर की रूपरेखा तैयार की थी। 1965 से 1969 के बीच अमेरिका में इस पर प्रयोग भी किए गए थे और यह सिद्ध हुआ था कि तरल नमक वाला माध्यम उच्च तापमान पर भी सुरक्षित रह सकता है।

भारत ने भी थोरियम ऊर्जा के उपयोग पर काफी पहले से काम किया है। डॉ. होमी भाभा ने तीन-स्तरीय परमाणु कार्यक्रम तैयार किया था, जिसमें थोरियम का प्रयोग महत्वपूर्ण हिस्सा था। भारत के कलपक्कम स्थित कामिनी रिएक्टर में यूरेनियम-233 आधारित रिएक्टर का संचालन भी किया गया था।

चीन ने 2011 में थोरियम मॉल्टन-सॉल्ट रिएक्टर को राष्ट्रीय वैज्ञानिक पायलट परियोजना का दर्जा दिया था। इसके बाद लगातार रिसर्च और परीक्षण के बाद 2023 में पहला क्रिटिकलिटी पॉइंट हासिल किया गया। अक्टूबर 2024 में थोरियम लोडिंग के बाद 2025 नवंबर में चीन ने आधिकारिक रूप से थोरियम से यूरेनियम रूपांतरण के आंकड़े सार्वजनिक किए।

इस उपलब्धि का मतलब है कि अब भविष्य में थोरियम का इस्तेमाल परमाणु ईंधन के रूप में किया जा सकता है, जिससे दुनिया को अधिक स्वच्छ, सुरक्षित और सस्ती ऊर्जा मिल सकती है। थोरियम पृथ्वी की परतों में यूरेनियम से तीन गुना ज्यादा पाया जाता है, इसलिए इसकी उपलब्धता भी अधिक है। चीन की यह खोज आने वाले दशकों में वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य को पूरी तरह बदल सकती है।

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