मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग न्यूज़
UP International Trade Show का आगाज, अमित शाह-योगी ने दिखाई यूपी के हुनर की ग्लोबल ताकत योगी सरकार का बड़ा ग्लोबल दांव, UPITS 2026 में 85 देशों के खरीदारों से जुड़ेंगे यूपी के उद्यमी पंजाब में ED रेड पर सियासी संग्राम, सिसोदिया बोले- छापेमारी में कुछ नहीं मिलने वाला SIR विवाद पर राहुल गांधी का बड़ा हमला, बोले- ‘वोट चोरी’ के बाद पाप धोने के लिए लाया गया SIR अखिलेश यादव की PDA रथयात्रा का अनोखा स्वागत, बुलडोजर से बरसाए गए फूल पंजाब में पटवारियों की हड़ताल खत्म, 1000 से ज्यादा पदों पर भर्ती को CM मान ने दिए निर्देश लखनऊ में आज से 4,526 प्लॉट का रजिस्ट्रेशन, CM योगी करेंगे नैमिष नगर-वरुण विहार का शुभारंभ यूपी चुनाव से पहले BJP का युवाओं पर फोकस, कॉलेज-यूनिवर्सिटी में चलेगा ‘सार्थक युवा संवाद’ धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा ऐलान, ‘हिंदू राष्ट्र’ संकल्प को लेकर 11 अक्टूबर से निकालेंगे रथ यात्रा यूपी चुनाव 2027 में JDU की एंट्री तेज, वाराणसी से निशांत कुमार करेंगे सियासी लॉन्चिंग

बोधन सिवानंदन और श्रीयस रॉयल का जलवा, दोनों ने जीते ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप के खिताब

बोधन सिवानंदन और श्रीयस रॉयल का जलवा, दोनों ने जीते ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप के खिताब

भारतीय मूल के दो युवा शतरंज खिलाड़ियों ने ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप 2026 में इतिहास रच दिया। 11 साल की बोधन सिवानंदन ने महिला वर्ग का खिताब अपने नाम किया, जबकि 17 साल के ग्रैंडमास्टर श्रीयस रॉयल ने ओपन चैंपियनशिप जीतकर अपना पहला ब्रिटिश खिताब हासिल किया।

बोधन सिवानंदन ब्रिटेन की सबसे कम उम्र की महिला चेस चैंपियन बन गई हैं। महिला खिताब के लिए उन्हें आयरलैंड की 14 वर्षीय ट्रिशा कन्यामाराला के खिलाफ रैपिड प्लेऑफ खेलना पड़ा। बोधन ने इस मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की और खिताब अप यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि वह ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप के ओपन टूर्नामेंट में भी पुरुष और महिला खिलाड़ियों के साथ खेलीं। टूर्नामेंट में उनकी एकमात्र हार श्रीयस रॉयल के खिलाफ हुई थी।

वहीं, 17 वर्षीय ग्रैंडमास्टर श्रीयस रॉयल ने ओपन वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपना पहला ब्रिटिश चैंपियनशिप खिताब जीता। उन्होंने नौ राउंड में 7.5 अंक हासिल किए और टूर्नामेंट में अपराजित रहे।

श्रीयस ने इस जीत के साथ ब्रिटिश चेस चैंपियन बनने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ियों में अपना नाम दर्ज करा लिया। वह इससे पहले 15 साल की उम्र में ब्रिटेन के सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर भी बने थे।

कोवेंट्री में आयोजित इस चैंपियनशिप में बोधन और श्रीयस की जीत को भारतीय मूल की युवा प्रतिभाओं की बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। दोनों खिलाड़ियों ने अलग-अलग वर्गों में खिताब जीतकर ब्रिटिश शतरंज में अपनी मजबूत पहचान बनाई है।

महज 11 और 17 साल की उम्र में दोनों की यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय शतरंज में उनकी बड़ी संभावनाओं की ओर इशारा करती है।

Share
अगला लेख → चार साल बाद प्रयागराज पहुंचे अली अहमद, पिता अतीक और भाई अबान…

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *