10 साल से फर्जी सर्टिफिकेट पर नौकरी! बिहार में महिला शिक्षिका पर विजिलेंस की FIR
बिहार के बांका जिले से सरकारी नौकरी में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक प्रखंड शिक्षिका ने कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक और प्रशैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर करीब 10 वर्षों तक सरकारी नौकरी की। मामले की जांच के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस) ने आरोपी शिक्षिका के खिलाफ बांका थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है।
आरोपी शिक्षिका की पहचान पायल सिंह के रूप में हुई है। वह लकड़ीकोला मध्य विद्यालय में प्रखंड शिक्षिका के पद पर कार्यरत बताई गई हैं। पायल सिंह अमरपुर थाना क्षेत्र के महादेवपुर के पास स्थित कोठिया गांव निवासी श्रवण कुमार सिंह की पत्नी हैं। उनकी नियुक्ति वर्ष 2015 में प्रखंड शिक्षिका के पद पर हुई थी।
विजिलेंस की जांच में उनके शैक्षणिक और प्रशैक्षणिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया गया। इसी दौरान उनके प्रशैक्षणिक प्रमाणपत्र को लेकर गंभीर गड़बड़ी सामने आई। दस्तावेज में झारखंड अधिविद्य परिषद (JAC), रांची का रोल कोड 01101 और रोल नंबर 002722 दर्ज था। प्रमाणपत्र में परीक्षा की तारीख 18 अगस्त 2014 और 1500 में 1137 अंक दर्शाए गए थे।
जब निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने इन दस्तावेजों का आधिकारिक सत्यापन झारखंड अधिविद्य परिषद से कराया, तो संबंधित रिकॉर्ड में इस रोल नंबर, अंकपत्र और प्रमाणपत्र का कोई विवरण नहीं मिला। परिषद की ओर से सत्यापन में बताया गया कि इस तरह का प्रमाणपत्र उसके स्तर से जारी नहीं किया गया था। इसके बाद जांच एजेंसी ने प्रमाणपत्र को कथित तौर पर फर्जी मानते हुए मामले में आगे की कार्रवाई शुरू की।
जांच के आधार पर विजिलेंस ने आरोप लगाया है कि फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सरकारी नौकरी हासिल की गई। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 468, 471 और 120बी के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने और उसके इस्तेमाल में शिक्षिका के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल थे।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2015 की बांका प्रखंड शिक्षक नियोजन प्रक्रिया पहले भी सवालों के घेरे में रही है। अब फर्जी प्रमाणपत्र से जुड़े मामलों की जांच तेज होने के बाद शिक्षा विभाग में भी हलचल बढ़ गई है। जांच एजेंसियां इस मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।
फिलहाल मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद आगे की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही कथित फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों और पूरे नेटवर्क की भूमिका को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।