राम मंदिर चंदा विवाद के बाद बिहार में मठ की जमीन का मामला गरमाया, 500 कट्ठा जमीन पर उठे सवाल
बिहार की राजधानी पटना से सटे नौबतपुर में एक मठ की करीब 22 बीघा यानी 500 कट्ठा जमीन को लेकर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। मठ की बेशकीमती जमीन की खरीद-बिक्री और दस्तावेजों में कथित हेरफेर को लेकर मामला तूल पकड़ता जा रहा है। विवाद बढ़ने के बाद नौबतपुर थाने के थानेदार मंजीत ठाकुर को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, मामला अब बिहार सरकार और पुलिस मुख्यालय के स्तर तक पहुंच गया है।
जानकारी के मुताबिक, नौबतपुर के शेखपुरा इलाके के एक मठ की जमीन पैनापुर में स्थित है। करीब 22 बीघा में फैली इस जमीन की कीमत इलाके में सड़क और विकास कार्यों के बाद काफी बढ़ गई। आरोप है कि इसी जमीन को लेकर अवैध तरीके से खरीद-बिक्री और बंदरबांट की कोशिश की गई। मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे, जिसके बाद नौबतपुर के थानेदार को निलंबित किए जाने की बात सामने आई है।
मामले में कुछ लोगों की ओर से पुलिस पर एक पक्ष को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि जमीन के कथित फर्जीवाड़े में भूमाफिया के साथ कुछ प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों की भूमिका हो सकती है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
मामला सामने आने के बाद बिहार पुलिस मुख्यालय ने पटना के प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारी को पत्र भेजकर कार्रवाई और जांच से जुड़ी जानकारी मांगी है। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर भी मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। मठ की जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है।
बताया जा रहा है कि सरकार की ओर से मामले की गोपनीय जांच शुरू कराई गई है। जांच में जमीन के स्वामित्व, पुराने दस्तावेजों, कथित खरीद-बिक्री और संबंधित अधिकारियों की भूमिका समेत कई पहलुओं को देखा जा सकता है। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ यह भी स्पष्ट होगा कि जमीन के रिकॉर्ड में किसी तरह की अनियमितता या धोखाधड़ी हुई है या नहीं।
पैनापुर स्थित इस जमीन का इतिहास भी विवादों से जुड़ा रहा है। स्थानीय जानकारी के अनुसार, 1990 के दशक में नक्सलियों ने भी इस जमीन पर कब्जे की कोशिश की थी। उस समय नौबतपुर, बिक्रम और पालीगंज क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों का प्रभाव था। बाद में बिहटा-सरमेरा रोड बनने के बाद इस इलाके में जमीन की कीमतों में तेजी आई। इसी वजह से मठ की बेशकीमती जमीन पर भूमाफियाओं की नजर पड़ने की बात कही जा रही है।
फिलहाल सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता मठ की जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और कथित लेन-देन की जांच करना है। अगर जांच में जमीन की खरीद-बिक्री में नियमों के उल्लंघन, फर्जी दस्तावेज या किसी अधिकारी की भूमिका सामने आती है, तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल किसी बड़े नाम की भूमिका को लेकर चल रही चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के संज्ञान में भी जानकारी पहुंचने की बात सामने आई है। पुलिस मुख्यालय की सक्रियता और थानेदार के निलंबन के बाद अब जांच पर सभी की नजरें हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मठ की जमीन के मामले में वास्तव में कितना बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ और इसमें कौन-कौन लोग जिम्मेदार हैं।