‘रेड से पता चला पंजाब में चुनाव आ गए’, CBI एक्शन पर CM भगवंत मान का पलटवार
पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के कैंप ऑफिस और उनके OSD राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े ठिकानों पर CBI की कार्रवाई के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस कार्रवाई को आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। संगरूर में उन्होंने कहा कि CBI की रेड से अब पता चल गया है कि पंजाब में चुनाव आने वाले हैं। हालांकि, CBI का कहना है कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और कथित प्रभाव के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों की जांच के तहत की गई है और यह पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद दर्ज FIR पर आधारित है।
CBI ने मंगलवार को पंजाब और चंडीगढ़ में कुल आठ ठिकानों पर तलाशी ली। इनमें भगवंत मान का कैंप ऑफिस, OSD राजबीर सिंह घुम्मन का आवास और उनसे जुड़े अन्य ठिकाने शामिल हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक तलाशी के दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन और कई दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। कार्रवाई चंडीगढ़ के अलावा मोहाली, पटियाला, लुधियाना, जालंधर, गुरदासपुर और संगरूर में भी की गई।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही विपक्षी नेताओं और उनके करीबियों को केंद्रीय जांच एजेंसियों के जरिए निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि जिन ठिकानों पर छापेमारी हुई, वहां जांच एजेंसी को कुछ नहीं मिला और कार्रवाई का उद्देश्य उन्हें, उनके परिवार तथा पंजाब सरकार को बदनाम करना है। मान ने कहा कि अगर सरकार ने कुछ गलत नहीं किया है तो वह किसी भी जांच से डरने वाली नहीं है। उनके इन आरोपों पर भाजपा की ओर से कहा गया है कि CBI की जांच हाईकोर्ट के निर्देश पर हो रही है, न कि किसी राजनीतिक निर्देश के तहत।
इस मामले में CBI ने राजबीर सिंह घुम्मन समेत छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। FIR में घुम्मन के अलावा नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर और आरएस नागरा के नाम शामिल हैं। CBI के अनुसार, आरोपों में IAS और IPS अधिकारियों की पोस्टिंग, विभागीय कार्रवाई, नीतिगत फैसलों, प्रशासनिक मंजूरियों, टेंडर की शर्तों, लाइसेंसिंग, जमीन के इस्तेमाल में बदलाव, संपत्ति विवाद और राजस्व से जुड़े मामलों को कथित आर्थिक लाभ के बदले प्रभावित करने की बात शामिल है। इन आरोपों की जांच अभी जारी है और आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
मामले की जांच CBI तक पहुंचने की शुरुआत प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की ओर से पंजाब पुलिस को भेजी गई जानकारी से हुई। इसके बाद मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा। 5 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने CBI को FIR दर्ज कर मामले की जांच करने का निर्देश दिया और दो महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने को कहा। इसके बाद CBI ने FIR दर्ज कर तलाशी की कार्रवाई शुरू की।
वहीं, पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। राज्य सरकार का कहना है कि CBI जांच का निर्देश उचित नहीं है और उसने इस मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार की याचिका पर विचार करने पर सहमति जताई है। इस बीच CBI की कार्रवाई ने पंजाब की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज कर दिया है।
मामले में अब जांच एजेंसी की कार्रवाई, जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच तथा सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार की चुनौती पर सभी की नजर है। फिलहाल CBI की जांच में लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप साबित नहीं हुए हैं और मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।