भगवंत मान के फ्रांस दौरे को हाईकोर्ट की मंजूरी, केंद्र की रोक के बाद पंजाब सरकार को राहत
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के फ्रांस दौरे को लेकर चल रहा विवाद अब खत्म होता दिखाई दे रहा है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री और उनके नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल को फ्रांस जाने की अनुमति देने का फैसला सुनाया है। इससे पहले केंद्र सरकार ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं और कार्यक्रम के निमंत्रण को लेकर आपत्तियां जताते हुए यात्रा की राजनीतिक मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। पंजाब सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था।
पंजाब सरकार ने अपनी याचिका में कहा था कि मुख्यमंत्री के विदेश दौरे के लिए जरूरी औपचारिकताएं समय रहते पूरी कर ली गई थीं, इसके बावजूद विदेश मंत्रालय के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन को अस्वीकृत कर दिया गया। सरकार के मुताबिक, आवेदन के सामने केवल ‘डिनाइड’ लिखा दिखाई दिया और इसे खारिज करने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। पंजाब सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया।
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से दलील दी गई कि मुख्यमंत्री का यह दौरा राज्य के कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। सरकार के मुताबिक, पंजाब स्टेट कोऑपरेटिव सप्लाई एंड मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड यानी मार्कफेड को पेरिस में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय खाद्य व्यापार मेले SIAL Paris 2026 में प्रदर्शनी स्टॉल आवंटित किया गया है। यह स्टॉल कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानी APEDA के इंडिया पवेलियन में दिया गया है। APEDA केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन काम करता है।
पंजाब सरकार का कहना था कि इस दौरे का उद्देश्य राज्य के कृषि और खाद्य उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा देना तथा व्यापार और निवेश के नए अवसर तलाशना है। सरकार की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि कार्यक्रम में भाग लेने के लिए निमंत्रण भारत सरकार की एक आधिकारिक एजेंसी के माध्यम से मिला था। पंजाब सरकार ने दलील दी कि कृषि राज्य का महत्वपूर्ण विषय है और ऐसे कार्यक्रम में भागीदारी से राज्य के किसानों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और निर्यात कारोबार को लाभ मिल सकता है।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने अदालत में मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। केंद्र की ओर से कहा गया कि भगवंत मान को सुरक्षा संबंधी खतरे हैं और फ्रांस में उनकी सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरतना जरूरी है। केंद्र ने यह आपत्ति भी उठाई कि जिस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पंजाब का प्रतिनिधिमंडल जा रहा है, उसके लिए निमंत्रण को लेकर सवाल हैं।
इन आपत्तियों के जवाब में पंजाब सरकार ने कहा कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा से जुड़े प्रबंधों को लेकर पहले ही आवश्यक जानकारी साझा की जा चुकी थी। सरकार के अनुसार, विदेश मंत्रालय ने करीब तीन सप्ताह पहले फ्रांस स्थित भारतीय दूतावास को मुख्यमंत्री के दौरे और सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में जानकारी दे दी थी। पंजाब सरकार ने सवाल उठाया कि जब यात्रा की मंजूरी के लिए प्रक्रिया काफी पहले शुरू कर दी गई थी और जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी थीं, तो अंतिम समय में बिना स्पष्ट कारण बताए अनुमति कैसे रोकी जा सकती है।
पंजाब सरकार ने अदालत में यह मुद्दा भी उठाया कि अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के विदेश दौरों को मंजूरी दी जाती रही है, जबकि पंजाब जैसे गैर-बीजेपी शासित राज्य के प्रतिनिधिमंडल को निवेश और व्यापारिक अवसर तलाशने के लिए विदेश जाने से रोका जा रहा है। सरकार ने हरियाणा के मुख्यमंत्री के हालिया विदेश दौरों का भी उल्लेख किया। हालांकि, ये दलीलें पंजाब सरकार की ओर से अदालत में रखी गई थीं।
याचिका के अनुसार, पंजाब सरकार ने विदेश मंत्रालय से राजनीतिक मंजूरी लेने के लिए 3 और 8 सितंबर को पत्र भेजे थे तथा 9 सितंबर को ऑनलाइन आवेदन भी जमा कराया था। सरकार का कहना है कि यात्रा से लगभग पांच सप्ताह पहले ही मंजूरी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। फ्रांस स्थित भारतीय मिशन से परामर्श के बाद प्रशासनिक मंजूरी और कैडर क्लीयरेंस से जुड़ी प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई थी।
मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भगवंत मान और उनके प्रतिनिधिमंडल को फ्रांस जाने की अनुमति देने का फैसला सुनाया। इस फैसले से पंजाब सरकार के प्रतिनिधिमंडल के लिए SIAL Paris 2026 में भाग लेने का रास्ता साफ हो गया है। अब इस दौरे के जरिए पंजाब के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पेश करने तथा नए व्यापारिक अवसर तलाशने पर नजर रहेगी।