पंजाब में नशे पर बड़ा प्रहार! ₹20.64 करोड़ की दवाएं जब्त, 520 केमिस्टों के लाइसेंस सस्पेंड
पंजाब में नशे के खिलाफ भगवंत मान सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है। राज्य में दवाओं की अवैध बिक्री और उनके दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए बड़े स्तर पर निरीक्षण किए जा रहे हैं। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 1 अप्रैल 2025 से 30 सितंबर 2026 के बीच फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन के ड्रग विंग ने कुल 16,788 निरीक्षण किए। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाली 214 लाइसेंस प्राप्त और बिना लाइसेंस वाली फर्मों से करीब 20.64 करोड़ रुपये की दवाएं जब्त की गईं। इसके अलावा, 520 केमिस्टों के लाइसेंस निलंबित किए गए, जबकि 22 केमिस्टों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए।
दवाओं की अवैध बिक्री और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की गई है। पंजाब में ऐसे मामलों में 54 मुकदमे दर्ज किए गए, जबकि 35 मामलों में दोषियों को सजा सुनाई गई और जुर्माना लगाया गया। फिलहाल, राज्य की अलग-अलग जिला अदालतों में इस तरह के 650 मामले लंबित हैं। सरकार का कहना है कि नियमित निरीक्षण और सख्त कार्रवाई का उद्देश्य दवाओं की आपूर्ति व्यवस्था को पारदर्शी बनाना और उनके गलत इस्तेमाल पर रोक लगाना है।
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के निर्देशों पर ड्रग विंग कानूनों का पालन सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्रवाई कर रहा है। सरकार का विशेष जोर उन दवाओं की बिक्री और वितरण पर नियंत्रण रखने पर है, जिनका इस्तेमाल नशे के लिए किया जा सकता है। इसी दिशा में प्रीगैब्लिन को लेकर भी अहम कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार की 13 मई 2026 की अधिसूचना संख्या जी.एस.ए. 377(ई) के तहत प्रीगैब्लिन को ड्रग्स रूल्स, 1945 के शेड्यूल एच1 में शामिल किया गया है। यह प्रावधान 12 नवंबर 2026 से लागू होगा।
पंजाब सरकार के मुताबिक, इससे पहले प्रीगैब्लिन को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 या ड्रग्स रूल्स, 1945 की किसी भी अनुसूची में शामिल नहीं किया गया था। इसके दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को कई पत्र लिखकर नियामकीय कदम उठाने की मांग की थी। सरकार का मानना है कि ऐसी दवाओं की बिक्री और वितरण पर प्रभावी निगरानी से इनके गलत इस्तेमाल को रोकने में मदद मिल सकती है।
सरकार ने ऑनलाइन दवाओं की बिक्री यानी ई-फार्मेसी को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट नियमों की कमी का मुद्दा भी केंद्र के सामने उठाया है। राज्य सरकार के अनुसार, कुछ ऐसी दवाएं ऑनलाइन आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं, जिनका दुरुपयोग नशे के लिए किया जा सकता है। इससे नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के प्रयास प्रभावित होते हैं। पंजाब सरकार ने राज्य में बिक्री के लिए आठ तरह के ड्रग फॉर्मूलेशन के स्टॉक पर प्रतिबंध भी लगाया है। हालांकि, ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के लिए प्रभावी नियामकीय ढांचे की कमी को कानून लागू करने में एक बड़ी चुनौती बताया गया है।
दवाओं की कीमतों में भारी अंतर का मामला भी पंजाब सरकार ने उठाया है। सरकार ने सवाल किया है कि जब अलग-अलग कंपनियों की दवाओं में सक्रिय औषधीय घटक यानी सॉल्ट एक ही होता है, तो उनकी कीमतों में इतना अंतर क्यों रहता है। राज्य सरकार का कहना है कि दवाओं की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम लोगों और मरीजों पर पड़ता है। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की भूमिका और दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के उपायों को लेकर भी चिंता जताई गई है।
भगवंत मान सरकार ने दोहराया है कि राज्य में दवाओं के कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना और जनस्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों का समाधान करना उसकी प्राथमिकता है। सरकार के मुताबिक, अवैध दवा कारोबार पर कार्रवाई, केमिस्टों के लाइसेंस के खिलाफ कदम और दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए नियामकीय प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।