परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड: CM भगवंत मान ने दिया गहन जांच का आश्वासन
नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। इस हत्याकांड को लेकर पंजाब की राजनीति से लेकर प्रशासन तक हलचल तेज है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने परिवार की मांग को स्वीकार करते हुए मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI को सौंपने का ऐलान किया। अब इस मामले में CBI ने FIR दर्ज कर जांच अपने हाथों में ले ली है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर परविंदर सिंह झोटा के साथ उस दिन क्या हुआ था? परिवार न्याय की मांग को लेकर अब तक विरोध क्यों कर रहा है? और इस मामले में जांच एजेंसियों के सामने कौन-कौन से सवाल हैं?
सबसे पहले बात करते हैं उस घटना की, जिसने पूरे पंजाब में आक्रोश पैदा कर दिया। 13 अक्टूबर 2026 को पंजाब के मानसा जिले में परविंदर सिंह झोटा की एक मेडिकल स्टोर पर गोली लगने से मौत हो गई थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, झोटा कथित तौर पर एक मेडिकल स्टोर पर नशीले पदार्थों की बिक्री को लेकर दुकानदार से सवाल कर रहे थे। इसी दौरान विवाद हुआ और गोली चलने की घटना सामने आई।
बताया गया है कि घटना के समय झोटा फेसबुक लाइव भी कर रहे थे। इस घटना में उनके साथ मौजूद चार अन्य लोग भी घायल हुए थे। मामले में मेडिकल स्टोर के मालिक अश्वनी कुमार को आरोपी बनाया गया। पुलिस ने उसे राजस्थान के सालासर से हिरासत में लिया था। हालांकि, हत्या के पीछे किसी बड़ी साजिश या अन्य लोगों की भूमिका है या नहीं, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद उनका परिवार लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा था। परिवार की प्रमुख मांग थी कि इस मामले की जांच पंजाब पुलिस के बजाय CBI से कराई जाए। 20 अक्टूबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने परिवार की मांग स्वीकार करने और केस CBI को सौंपने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार परविंदर सिंह झोटा के परिवार के साथ खड़ी है और पंजाब को नशामुक्त बनाने की लड़ाई में पीछे नहीं हटेगी। इसके बाद CBI की टीम मानसा पहुंची और जांच से संबंधित दस्तावेज तथा साक्ष्य अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू की।