पेपर लीक से राम मंदिर चढ़ावा विवाद तक, हर स्तर पर भ्रष्टाचार जिम्मेदार: मायावती
बसपा प्रमुख मायावती ने पहली बार नीट पेपर लीक विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पेपर लीक और राम मंदिर चढ़ावा विवाद जैसी घटनाओं की जड़ भ्रष्टाचार है। उन्होंने छात्र आंदोलन के राजनीतिकरण पर चिंता जताई और सरकार व आंदोलनकारियों से संवाद के जरिए शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की।
लखनऊ | 23 जुलाई 2026: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने नीट समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे पर पहली बार खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक का मामला अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर सड़क से लेकर संसद तक दिखाई दे रहा है। उन्होंने आंदोलन के राजनीतिकरण पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार और आंदोलनकारियों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की।
गुरुवार को जारी अपने बयान में मायावती ने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के नेतृत्व में चल रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन उन लाखों छात्र-छात्राओं और उनके परिवारों की पीड़ा से जुड़ा है, जो नीट सहित विभिन्न परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि अब यह आंदोलन राजनीतिक रंग ले चुका है, जिससे सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। इसका प्रभाव केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि कई राज्यों में भी सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
बसपा प्रमुख ने कहा कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और देशभर में सामने आए पेपर लीक के मामले एक ही समस्या की ओर इशारा करते हैं—भ्रष्टाचार। उनके अनुसार, हर स्तर पर बढ़ता भ्रष्टाचार ऐसी घटनाओं को जन्म दे रहा है और इससे जनता का सरकारी संस्थाओं पर भरोसा कमजोर हो रहा है।
मायावती ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सुशासन के लिए संवैधानिक नैतिकता को सबसे अधिक महत्व दिया था। उन्होंने कहा कि जब शासन-प्रशासन में नैतिकता कमजोर होती है, तब भ्रष्टाचार देश को दीमक की तरह खोखला करने लगता है।
उन्होंने सरकार और न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्थाओं से अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने की अपील करते हुए कहा कि वर्तमान हालात का समाधान सकारात्मक पहल और पारदर्शी कार्रवाई से ही संभव है।
मायावती ने यह भी कहा कि छात्र आंदोलन का विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा अपने-अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क से लेकर संसद तक टकराव और हिंसा का माहौल किसी के हित में नहीं है।
अपने बयान के अंत में बसपा प्रमुख ने सरकार और आंदोलनकारियों दोनों से अपील की कि वे आपसी संवाद के माध्यम से जल्द से जल्द शांतिपूर्ण और सम्मानजनक समाधान निकालें, ताकि छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में जनता का विश्वास बहाल हो सके।