GST रेट कटौती से सरकार पर बोझ बढ़ेगा या नहीं? क्रिसिल रिपोर्ट ने दावों को किया खारिज l
हाल ही में GST रेटों में की गई कटौती के बाद चर्चा शुरू हो गई कि इससे सरकार की आमदनी पर बड़ा असर पड़ सकता है और राजस्व घाटा बढ़ेगा। हालांकि क्रिसिल की ताजा रिपोर्ट में इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, GST रेटों को तर्कसंगत बनाना एक सकारात्मक कदम है जिसका उद्देश्य अधिक वस्तुओं और सेवाओं को औपचारिक कर दायरे में लाना है। इससे मध्यम अवधि में टैक्स संग्रहण प्रणाली में मजबूती आएगी। यानी लंबी अवधि में सरकार की आमदनी पर कोई नकारात्मक असर नहीं होगा, बल्कि सुधार के कारण टैक्स बेस और भी बढ़ेगा।
इतना ही नहीं, रिपोर्ट यह भी बताती है कि GST का सरलीकरण कर फॉर्मल सेक्टर में विस्तार करेगा, जिससे अर्थव्यवस्था में अधिक ट्रांजेक्शन टैक्स सही तरीके से कलेक्ट होगा। इससे कर चोरी कम होगी और कर अनुपालन बेहतर होगा। सभी तरह की वस्तुओं और सेवाओं पर निरंतर और समान दरें लगने से निर्माताओं और उपभोक्ताओं को भी फायदा होगा।
क्रिसिल के विश्लेषण के मुताबिक, प्रारंभिक दौर में सरकार को कुछ राजस्व हानि उठानी पड़ सकती है लेकिन वह अस्थायी होगी। इसके बाद वर्तमान आर्थिक विकास दर और बेहतर कर संग्रह क्षमताओं के चलते संग्रह में बढ़ोतरी होगी।
इस बदलाव से उपभोक्ता वस्तुओं पर कर दरें कम होने से मांग में वृद्धि की संभावना है, जिससे उत्पादन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। इससे रोजगार सृजन में भी मदद मिलेगी, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।
सरकार ने भी पहले ही बताया है कि इस कटौती को लेकर केंद्र को करीब 48,000 करोड़ रुपये का घाटा हो सकता है, जिसे आने वाले वर्षों में बेहतर कर अनुपालन और आर्थिक वृद्धि से पूरा किया जाएगा।