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मानसून सत्र से पहले मायावती की अपील, संसद में शोर नहीं, जनहित के मुद्दों पर हो बहस

बसपा प्रमुख मायावती ने संसद के मानसून सत्र से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष से लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद में शोर-शराबे की बजाय महंगाई, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, पेपर लीक और राम मंदिर चढ़ावा विवाद जैसे जनहित के मुद्दों पर गंभीर बहस होनी चाहिए।

मानसून सत्र से पहले मायावती की अपील, संसद में शोर नहीं, जनहित के मुद्दों पर हो बहस

लखनऊ, 19 जुलाई। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष से स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि संसद में बार-बार होने वाले हंगामे और कार्यवाही स्थगित होने के बजाय देश के ज्वलंत जनहित के मुद्दों पर गंभीर और सार्थक चर्चा होनी चाहिए।

रविवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने संदेश में मायावती ने कहा कि देश इस समय महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, पेपर लीक जैसी अनेक गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में संसद का बहुमूल्य समय इन समस्याओं के समाधान तलाशने में लगाया जाना चाहिए।

बसपा प्रमुख ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले का भी उल्लेख करते हुए कहा कि कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर देशभर में व्यापक चर्चा और आक्रोश है। उन्होंने कहा कि यह मामला सड़कों से लेकर अदालत तक पहुंच चुका है और संसद में भी इस पर चर्चा होने की संभावना है।

मायावती ने अपने बयान में पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति, राजस्थान में गर्भवती महिलाओं की मौत, महिला सुरक्षा, सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार, पुलिस मुठभेड़ों तथा अतिक्रमण हटाने के दौरान बस्तियों के ध्वस्तीकरण जैसे मुद्दों को भी संसद में उठाए जाने योग्य बताया।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय हालात का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव तथा रुपये के अवमूल्यन का असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा है। ऐसे विषयों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित में समाधान खोजने की दिशा में कार्य करना चाहिए।

मायावती ने कहा कि वर्तमान सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए संसद का मानसून सत्र बिना किसी उत्तेजना, रोष और विद्वेष के लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप संचालित होना समय की आवश्यकता है। उन्होंने सभी संवैधानिक संस्थाओं से भी आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी और जवाबदेह भूमिका निभाने का आग्रह किया।

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