मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग न्यूज़
छात्रों के समर्थन में अन्ना हजारे मौन व्रत पर, आंदोलन को मिला बड़ा साथ जंतर-मंतर पर अफरा-तफरी, छात्रों और निहंगों के बीच धक्का-मुक्की से बढ़ा तनाव PM मोदी के ऐलान पर राहुल गांधी का पलटवार, रखीं 3 बड़ी मांगें CJP Protest: दिल्ली में बवाल, 16 मेट्रो स्टेशन बंद; सरकार से बातचीत को तैयार CJP पंजाब में बनाए जाएंगे 10 लाख नए राशन कार्ड 22 जुलाई से शुरू होंगे आवेदन :मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान PM मोदी का राहुल गांधी पर तंज: मैं 56 साल के युवा की बात नहीं, 28 साल के युवाओं की बात कर रहा हूं सोनम वांगचुक को दूसरे अस्पताल शिफ्ट करने की मांग, दिल्ली हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई जंतर-मंतर से अभिजीत दीपके को पुलिस ने हिरासत में लिया, संसद मार्च के बीच बड़ी कार्रवाई CJP प्रवक्ता सरकार से मिलने पहुंचे, संसद मार्च पर बढ़ी सियासी हलचल ‘हर अभद्र शब्द अश्लील नहीं’— सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

वकील ने जज को कहा ‘गुंडा’, शर्ट के बटन भी नहीं लगाए थे, हाईकोर्ट ने जेल भेजने का दिया आदेश

वकील ने जज को कहा ‘गुंडा’, शर्ट के बटन भी नहीं लगाए थे, हाईकोर्ट ने जेल भेजने का दिया आदेश

लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने गुरुवार को एक अहम फैसले में स्थानीय वकील अशोक पांडे को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराते हुए उन्हें छह महीने की जेल की सजा सुनाई। यह मामला उस समय सामने आया जब पांडे 18 अगस्त 2021 को बिना वकील की निर्धारित पोशाक के और खुले बटन वाली शर्ट पहनकर अदालत में पेश हुए। इसके साथ ही उन्होंने न्यायालय में अनुचित व्यवहार करते हुए जजों को ‘गुंडा’ तक कह डाला।

कोर्ट ने इस गंभीर आचरण को स्वत: संज्ञान में लेते हुए अवमानना की कार्रवाई शुरू की थी। बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद पांडे ने कोर्ट की कार्यवाही में कोई हिस्सा नहीं लिया और न ही आरोपों का जवाब दिया। इसी कारण अदालत ने उन्हें दोषी मानते हुए 2000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यदि वह यह जुर्माना एक महीने के भीतर नहीं चुकाते, तो उन्हें एक महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

अदालत की टिप्पणी: फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति बी.आर. सिंह की पीठ ने कहा कि अशोक पांडे का रवैया न्यायपालिका की गरिमा के विरुद्ध है और उनके पहले के व्यवहार को देखते हुए उन पर ‘उदाहरणात्मक सजा’ देना आवश्यक हो गया था।

चार हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश: अदालत ने पांडे को निर्देश दिया है कि वे लखनऊ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष चार सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करें। इसके अलावा, उन्हें यह बताने के लिए भी कहा गया है कि क्यों न उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट और इसकी लखनऊ पीठ में वकालत करने से प्रतिबंधित कर दिया जाए। इसके लिए उन्हें 1 मई तक जवाब दाखिल करना होगा।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि इससे पहले 2017 में भी पांडे को हाईकोर्ट परिसर से दो साल के लिए प्रतिबंधित किया गया था। कोर्ट ने उस समय की अवमानना संबंधी घटनाओं का भी संज्ञान लिया है।

इस तरह के मामलों में अदालत की गरिमा बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाए जाते हैं और यह फैसला उसी दिशा में एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

Share This
अगला लेख → लखनऊ की प्रसिद्ध बाजपेई पूड़ी दुकान पर GST विभाग का छापा, टै…

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ताज़ा ख़बरें
बाज़ार
सेंसेक्स 76,766 -70 (-0.09%)
निफ्टी 23,985 -11 (-0.05%)
मौसम
23°C
Patchy rain nearby
💧 91% 💨 4 km/h
Dehradun