Crime

10 लाख में तय हुई थी अधिवक्ता की हत्या की सुपारी, मिले सिर्फ 50 हजार; मोनू का पिता फरार

उत्तर प्रदेश के जालौन में कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गयादीन अहिरवार की हत्या के मामले में पुलिस जांच के दौरान कई अहम खुलासे हुए हैं। पुलिस के मुताबिक, हत्या के लिए 10 लाख रुपये में सौदा तय हुआ था, लेकिन आरोपियों को अब तक केवल 50 हजार रुपये ही मिले थे। जांच में यह भी सामने आया है कि ठेकेदार इंद्रजीत यादव और मोनू के पिता अजय कुमार यादव के बीच संपर्क के लिए मोबाइल मैसेज का इस्तेमाल किया जाता था। दोनों को फोन पर बात नहीं करने की हिदायत दी गई थी। पुलिस का मानना है कि अगर आरोपियों को पूरी रकम मिल जाती तो वे फरार होने की कोशिश कर सकते थे।

पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद अजय कुमार यादव ने इंद्रजीत यादव को मोबाइल पर मैसेज भेजकर काम पूरा होने और भुगतान करने की बात कही थी। यही मैसेज पुलिस के हाथ लगा और जांच में अहम सुराग साबित हुआ। बताया जा रहा है कि इंद्रजीत ने अजय को पहले ही कह दिया था कि वह फोन न करे और केवल मैसेज के जरिए बातचीत करे। पुलिस अब इस बातचीत और भुगतान से जुड़े अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।

इस मामले में सौदे की मध्यस्थता कराने वाला अजय कुमार यादव अब भी फरार है। वह मुख्य आरोपी पवन यादव उर्फ मोनू का पिता है। पुलिस के मुताबिक, अजय ने ठेकेदार इंद्रजीत यादव और सुपारी लेने वाले आरोपियों के बीच संपर्क कराने में भूमिका निभाई थी। सीओ राजेश कमल ने बताया कि अजय की तलाश की जा रही है और उसकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।

पुलिस की जांच अब गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है। विवेचक के अनुसार, आरोपियों के संपर्क में रहने वाले अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। इसके लिए मोबाइल फोन की कॉल डिटेल और दूसरे साक्ष्यों की जांच की जा रही है। यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अपहरण में इस्तेमाल कार के मालिक को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि कार केशव कटियार चला रहा था, लेकिन वाहन किसके नाम पर पंजीकृत है और उसके मालिक की क्या भूमिका थी, इसकी जांच जारी है।

हत्याकांड के फरार मुख्य आरोपी पवन यादव उर्फ मोनू को मंगलवार देर रात पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस के मुताबिक, जोल्हूपुर-मदारीपुर मार्ग पर सोहरापुर गांव के पास घेराबंदी के दौरान आरोपी ने पुलिस टीम पर फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में उसके दोनों पैरों में गोली लगी। उसके पास से तमंचा, कारतूस, बाइक और मोबाइल फोन बरामद किए जाने की जानकारी दी गई है। मोनू पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। इससे पहले पुलिस सर्वेश शुक्ला, आशीष विश्वकर्मा और केशव कटियार को गिरफ्तार कर चुकी थी। जमीन विवाद को हत्या की वजह बताया जा रहा है और ठेकेदार इंद्रजीत यादव को भी इस मामले में हिरासत में लिया गया था।

गौरतलब है कि कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गयादीन अहिरवार (68) का शनिवार शाम कार सवार बदमाशों ने अपहरण कर लिया था। रविवार सुबह उनका शव कानपुर नगर के गुजैनी थाना क्षेत्र के गंभीरपुर गांव के पास नहर में मिला था। घटना के बाद से ही अधिवक्ताओं में नाराजगी है। मुख्य आरोपी मोनू की गिरफ्तारी के बाद भी उनका विरोध प्रदर्शन जारी है। बुधवार को तहसील परिसर में पूर्व अध्यक्ष अमर सिंह निषाद की अगुवाई में अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन किया और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने हत्याकांड में शामिल सभी लोगों की गिरफ्तारी के साथ उन लोगों की भूमिका की जांच की मांग की, जिनसे दिवंगत अध्यक्ष ने पहले जान का खतरा जताया था। अधिवक्ताओं ने सात नवंबर तक न्यायिक कार्य से विरत रहने का ऐलान किया है।

उधर, जिला बार संघ के अध्यक्ष ऋषि कुमार पटेल और वरिष्ठ अधिवक्ता शिवेश सेंगर सहित अन्य वकीलों ने पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर चार मांगें रखीं। इनमें मामले की विवेचना सीओ कालपी से हटाकर किसी अन्य योग्य अधिकारी को सौंपना, पीड़ित परिवार के घर पर दो पुलिसकर्मियों की तैनाती, आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) सहित कठोर वैधानिक कार्रवाई और पहले दिए गए आश्वासनों को जल्द पूरा करना शामिल है। एसपी ने अधिवक्ताओं को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

फिलहाल पुलिस के सामने फरार अजय कुमार यादव की गिरफ्तारी, अपहरण में इस्तेमाल कार के मालिक की भूमिका स्पष्ट करना और अन्य संभावित आरोपियों की पहचान करना बड़ी चुनौती है। वहीं, अधिवक्ता समुदाय निष्पक्ष जांच और सभी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़ा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button