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प्रयागराज में 15 साल पुराने स्कूली वाहन होंगे सीज, स्कूल प्रबंधन पर भी कार्रवाई

प्रयागराज में 15 साल पुराने स्कूली वाहन होंगे सीज, स्कूल प्रबंधन पर भी कार्रवाई

प्रयागराज में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। जिले में छात्र-छात्राओं के सुरक्षित आवागमन और स्कूली वाहनों में निर्धारित सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराने के लिए ‘मिशन सेफ भविष्य अभियान-3’ शुरू किया गया है। यह अभियान 14 सितंबर से 19 सितंबर तक चलाया जाएगा। अभियान के तहत 15 वर्ष से पुराने स्कूली वाहन संचालित मिलने पर उन्हें तत्काल सीज करने की कार्रवाई की जाएगी।

परिवहन विभाग के निर्देश के मुताबिक, यदि कोई 15 साल पुराना स्कूली वाहन बच्चों को ढोते हुए पाया जाता है तो वाहन को जब्त करने के साथ ही उसके मालिक और संबंधित स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।

अभियान के पहले दिन सोमवार को प्रवर्तन दल की ओर से जांच की गई, हालांकि कोई भी 15 वर्ष पुराना स्कूली वाहन पकड़ में नहीं आया। बताया गया कि पहले दिन परिवहन विभाग के प्रवर्तन दल के कई अधिकारी शहर से बाहर थे, जिसके कारण अभियान की कार्रवाई सीमित रही। आने वाले दिनों में जांच और कार्रवाई तेज किए जाने की संभावना है।

दरअसल, प्रयागराज में अनफिट और पुराने स्कूली वाहनों के खिलाफ परिवहन विभाग पहले भी कई बार अभियान चला चुका है। कार्रवाई के बावजूद कुछ पुराने और मानकों पर खरे न उतरने वाले वाहन अब भी सड़कों पर चलते दिखाई देते हैं। इनमें कुछ वाहन ऐसे भी हैं जो 15 वर्ष की निर्धारित आयु पूरी कर चुके हैं। इसी को देखते हुए परिवहन आयुक्त ने अधिकारियों को विशेष अभियान चलाकर ऐसे वाहनों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

अभियान के दौरान केवल वाहन की उम्र ही नहीं, बल्कि उसके जरूरी दस्तावेज और सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच की जाएगी। 15 वर्ष से कम पुराने स्कूली वाहनों का पंजीकरण प्रमाण पत्र, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र, परमिट और फिटनेस प्रमाणपत्र दुरुस्त होना जरूरी है। दस्तावेज अधूरे या मानकों के विपरीत पाए जाने पर संबंधित वाहन को सीज करने की कार्रवाई की जा सकती है।

स्कूली वाहनों में बच्चों की सुरक्षा के लिए अटेंडेंट की व्यवस्था करना भी अनिवार्य किया गया है। खास तौर पर जिस वाहन में छात्राएं यात्रा करती हैं, उसमें महिला अटेंडेंट की नियुक्ति जरूरी होगी। परिवहन विभाग ने विद्यालय प्रबंधन से इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

इसके साथ ही प्रत्येक विद्यालय में विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति गठित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस समिति के माध्यम से स्कूली वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था, दस्तावेज और बच्चों के सुरक्षित आवागमन से जुड़े मानकों पर नजर रखी जाएगी। परिवहन विभाग का उद्देश्य अभियान के जरिए पुराने और अनफिट वाहनों को हटाने के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन को सुरक्षा नियमों के प्रति जवाबदेह बनाना है।

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