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भरत भूषण तिवारी स्मारक पर प्रशासन की रोक, श्रद्धास्थल बनी जगह पर माथे से मिट्टी लगा रहे समर्थक

भरत भूषण तिवारी स्मारक पर प्रशासन की रोक, श्रद्धास्थल बनी जगह पर माथे से मिट्टी लगा रहे समर्थक

जिस स्थान पर भरत भूषण तिवारी को गोली लगी थी और जहां उन्होंने अंतिम सांस ली थी, वह जगह अब उनके समर्थकों और स्थानीय लोगों के लिए आस्था और श्रद्धा का केंद्र बन गई है। बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। कई श्रद्धालु उस स्थान की मिट्टी को अपने माथे पर लगाकर उन्हें नमन कर रहे हैं। भरत तिवारी के निधन के बाद समर्थकों ने उस स्थान को ईंटों से घेरकर सुरक्षित कर दिया था और उनकी स्मृति में वहां स्थायी स्मारक बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई थी।

हालांकि, स्मारक निर्माण की शुरुआत होते ही भोजपुर प्रशासन ने इस पर रोक लगा दी। प्रशासन का कहना है कि जिस जमीन पर स्मारक बनाया जा रहा है, वह सरकारी भूमि है और उससे जुड़ा भूमि विवाद भी सामने आया है। इसी कारण फिलहाल निर्माण कार्य रोक दिया गया है। दूसरी ओर, समर्थक और परिजन स्मारक निर्माण की मांग पर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि यह स्थान भरत भूषण तिवारी की याद में संरक्षित किया जाना चाहिए।

जानकारी के अनुसार, भरत भूषण तिवारी की स्मृति में बनने वाले प्रस्तावित स्मारक का पूरा खर्च उत्तराखंड के मठ के स्वामी आनंद स्वरूप महाराज उठाने वाले हैं। कुछ दिन पहले स्वामी आनंद स्वरूप महाराज बिलौटी गांव पहुंचे थे, जहां उन्होंने परिजनों से मुलाकात की और प्रस्तावित स्मारक स्थल पर प्रतीकात्मक रूप से पहली ईंट रखी थी। योजना के पहले चरण में वहां 8×8 फीट का सफेद संगमरमर का चबूतरा बनाया जाना था।

इस बीच, भरत भूषण तिवारी के श्राद्धकर्म और ब्रह्मभोज को लेकर भी व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। आयोजकों का दावा है कि इस कार्यक्रम में 20 से 25 हजार लोगों के शामिल होने की संभावना है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।

स्मारक निर्माण को लेकर एक ओर जहां समर्थकों में भावनात्मक जुड़ाव देखने को मिल रहा है, वहीं प्रशासन भूमि संबंधी नियमों का हवाला देते हुए फिलहाल निर्माण की अनुमति देने के पक्ष में नहीं है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि भूमि विवाद का समाधान कैसे निकलता है और भरत भूषण तिवारी की स्मृति में प्रस्तावित स्मारक को लेकर आगे क्या फैसला लिया जाता है।

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