1952 से रिश्तों की शुरुआत, फिर दूरी… क्या फिर करीब आएंगे अकाली दल और BJP?
पंजाब की राजनीति में शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के रिश्ते एक बार फिर चर्चा में हैं। दोनों दलों के बीच लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक दोस्ती, फिर हुई दूरी और बदलते सियासी समीकरणों के बीच अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या दोनों पार्टियां दोबारा साथ आ सकती हैं?
अकाली दल और BJP के बीच संबंधों का इतिहास काफी पुराना है। दोनों दलों ने अलग-अलग दौर में पंजाब की राजनीति में एक-दूसरे के साथ सहयोग किया। समय के साथ यह रिश्ता एक मजबूत चुनावी गठबंधन में बदल गया और दोनों पार्टियों ने कई चुनाव मिलकर लड़े।
इस गठबंधन में अकाली दल का मुख्य आधार पंजाब की सिख राजनीति और ग्रामीण क्षेत्रों में रहा, जबकि BJP का प्रभाव मुख्य रूप से शहरी मतदाताओं के बीच माना जाता रहा। यही सामाजिक और राजनीतिक समीकरण दोनों दलों के गठबंधन की बड़ी ताकत बना।
हालांकि लंबे समय तक साथ रहने के बाद दोनों दलों के रिश्तों में उस समय बड़ा मोड़ आया, जब केंद्र सरकार के कृषि कानूनों को लेकर पंजाब में विरोध शुरू हुआ। अकाली दल ने सितंबर 2020 में NDA से अलग होने का फैसला किया। इसके बाद दोनों दलों ने अलग-अलग राह पकड़ ली।
अलगाव के बाद पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बने और दोनों पार्टियों ने अपने दम पर राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश की।
अब बदलते राजनीतिक माहौल में अकाली दल और BJP के संभावित पुनर्गठबंधन को लेकर चर्चा हो रही है। हालांकि किसी भी औपचारिक गठबंधन की पुष्टि के बिना इसे फिलहाल राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।
अगर दोनों दल दोबारा साथ आते हैं, तो पंजाब में चुनावी समीकरणों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। वहीं, गठबंधन की राह में पुराने मतभेद और सीट बंटवारे जैसे मुद्दे भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।