यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड: FIR में बड़ा खुलासा, यात्रियों के मुताबिक बीड़ी पी रहे थे ड्राइवर-कंडक्टर
यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर एसी बस में लगी भीषण आग के मामले में जांच के दौरान कई गंभीर बातें सामने आई हैं। दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही राज कल्पना ट्रैवल्स की बस (BR32PA8647) में 23-24 सितंबर की दरमियानी रात आग लग गई थी। हादसे में 9 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक यात्रियों को रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला गया।
जेवर थाने में दर्ज शिकायत के मुताबिक, हादसे से कुछ समय पहले यात्रियों को बस के आगे के हिस्से से जलने जैसी तेज गंध महसूस हुई थी। यात्रियों ने चालक और परिचालक को इसकी जानकारी देते हुए बस रोकने की बात कही। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि चालक और परिचालक ने यात्रियों की चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया और कथित तौर पर केबिन में बीड़ी-सिगरेट पीते रहे। एक यात्री ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया कि बस रोकने की मांग पर उन्हें धमकाते हुए कहा गया, “मरना है तो मरो, बस नहीं रोकेंगे।” ये बातें फिलहाल शिकायत और FIR में लगाए गए आरोपों का हिस्सा हैं और मामले की जांच जारी है।
यात्रियों के मुताबिक, कुछ ही देर बाद चालक की सीट के पास अचानक आग की लपटें उठने लगीं। देखते ही देखते बस के अंदर घना धुआं भर गया और यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। कई लोगों ने खिड़कियों के शीशे तोड़कर बस से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। हालांकि, आग और धुएं की चपेट में आने के कारण 9 यात्री बस के अंदर ही फंस गए। रेस्क्यू टीम ने बाद में बस के अंदर से उनके शव बरामद किए।
हादसे के बाद पुलिस और फायर सर्विस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। 5 दमकल गाड़ियों की मदद से करीब 45 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप कुमार के मुताबिक, शुरुआती जांच में बस के एसी में स्पार्क या शॉर्ट सर्किट होने के बाद इंजन के लुब्रिकेंट ऑयल में आग लगने की आशंका सामने आई है। हालांकि, आग लगने की अंतिम वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
पुलिस ने मामले में बस के चालक और परिचालक को हिरासत में लिया है और संबंधित धाराओं में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस हादसे के कारणों के साथ-साथ चालक और परिचालक की भूमिका तथा यात्रियों द्वारा लगाए गए आरोपों की भी जांच कर रही है।
हादसे में मारे गए यात्रियों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दो मृतकों की पहचान देवेंद्र भारद्वाज, निवासी हिसार और हरिशरण गुप्ता, निवासी उरई के रूप में हुई है। देवेंद्र भारद्वाज की पत्नी रेखा भारद्वाज भी हादसे में गंभीर रूप से झुलसी हैं और उनका इलाज चल रहा है। अन्य मृतकों की पहचान के लिए पुलिस प्रयास कर रही है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर दुख जताया और अधिकारियों को घायलों के समुचित इलाज तथा प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। राज्य सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।
यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए इस हादसे ने लंबी दूरी की स्लीपर बसों में सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी जांच और आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े सवाल फिर खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस की जांच और तकनीकी परीक्षण से यह स्पष्ट होगा कि बस में आग लगने की वास्तविक वजह क्या थी और हादसे में लापरवाही की जिम्मेदारी किसकी बनती है।