8वीं पास ‘डॉक्टर’ बेच रहा था नकली शक्तिवर्धक दवाएं, कॉल सेंटर पर पुलिस का छापा
उत्तर प्रदेश के बरेली में नकली यौनवर्धक दवाओं का ऑनलाइन कारोबार करने वाले एक गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने राजीव एन्क्लेव स्थित एक मकान में छापा मारकर गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी मौके से फरार हो गया। पुलिस के मुताबिक, गिरोह सोशल मीडिया के जरिए ग्राहकों से संपर्क करता था और नकली दवाओं को मर्दाना कमजोरी दूर करने वाली दवा बताकर बेचता था।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान समीरउद्दीन (24) निवासी देवरनियां और यूसुफ (25) निवासी बड़ी बिहार के रूप में हुई है। गिरोह का तीसरा सदस्य इलियास खान पुलिस टीम के पहुंचते ही मकान के पिछले दरवाजे से फरार हो गया। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस दबिश दे रही है।
छापेमारी के दौरान पुलिस को मकान के अंदर बाकायदा कॉल सेंटर जैसा सेटअप मिला। मौके से 6 कंप्यूटर, 8 मॉनिटर, एक लैपटॉप, 3 प्रिंटर, एक स्कैनर और 12 मोबाइल फोन बरामद किए गए। इसके अलावा नकली दवाओं के 85 पैकेट, पैकिंग का सामान, फर्जी मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस, 6 चेकबुक, 14 एटीएम कार्ड और करीब 1.99 लाख रुपये नकद भी पुलिस के हाथ लगे।
जांच में सामने आया कि गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए ग्राहकों तक पहुंचता था। आरोपियों ने ‘हर्बल एंड जड़ीबूटी’ नाम से एक पेज बना रखा था, जहां कथित तौर पर दवाओं का प्रचार किया जाता था। ग्राहक जब संपर्क करते थे तो 8वीं पास समीरउद्दीन खुद को डॉक्टर और हकीम बताकर उनसे बातचीत करता था। वह ग्राहकों को कथित यौन कमजोरी दूर करने का दावा करते हुए दवा खरीदने के लिए तैयार करता था।
ऑर्डर मिलने के बाद दवाओं को पार्सल के जरिए ग्राहकों तक भेजा जाता था। पुलिस के मुताबिक, इसके बदले ग्राहकों से यूपीआई के माध्यम से करीब 250 से 300 रुपये या उससे अधिक रकम ली जाती थी। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में भी पार्सल भेजे जाते थे।
पुलिस की जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी दवाओं को तैयार करने के लिए सहारनपुर और मुरादाबाद के बाजारों से सस्ता पाउडर और अन्य कच्चा माल खरीदते थे। इसके बाद पाउडर को खाली कैप्सूल में भरकर उनकी पैकिंग की जाती थी। देवरनियां कस्बे में आरोपियों की एक दुकान होने की जानकारी भी पुलिस को मिली है, जिसकी भूमिका की जांच की जा रही है।
कार्रवाई से बचने और अपने कारोबार को वैध दिखाने के लिए गिरोह ने दवाओं के निर्माण से संबंधित फर्जी लाइसेंस भी तैयार करा रखा था। पुलिस की शुरुआती जांच में आरोपियों से जुड़े बैंक खातों में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। अब पुलिस बैंक खातों और लेनदेन की विस्तृत जांच कर रही है।
एसपी सिटी मानुष पारीक के मुताबिक, आरोपी सोशल मीडिया और तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल कर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, नकली दवाओं के सप्लायर और पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच कर रही है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है और फरार इलियास खान की तलाश जारी है।