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बिहार में नवरात्रि की खुशियां मातम में बदलीं, 10 जिलों में डूबने से 16 लोगों की मौत

बिहार में नवरात्रि की खुशियां मातम में बदलीं, 10 जिलों में डूबने से 16 लोगों की मौत

बिहार में शारदीय नवरात्रि की तैयारियों के बीच कई परिवारों की खुशियां मातम में बदल गईं। राज्य के 10 जिलों में नदियों और तालाबों में डूबने से कुल 16 लोगों की मौत हो गई। ये हादसे कलश स्थापना और शोभायात्रा के लिए जल लाने की परंपरा यानी जलबोझी के दौरान हुए। त्योहार की तैयारियों के बीच हुई इन दर्दनाक घटनाओं से प्रभावित इलाकों में शोक का माहौल है।

जानकारी के मुताबिक, सबसे ज्यादा मौतें उत्तर बिहार के जिलों में हुई हैं। मुजफ्फरपुर, दरभंगा और सीतामढ़ी में तीन-तीन लोगों की डूबने से जान चली गई। इसके अलावा समस्तीपुर, शिवहर, भोजपुर, सारण, बेगूसराय, नवादा और रोहतास में भी एक-एक व्यक्ति की मौत की सूचना है। इस तरह राज्य के कुल 10 जिलों में हुए इन हादसों में 16 लोगों की जान चली गई।

बताया जा रहा है कि इन घटनाओं के पीछे कई जगहों पर नदियों और तालाबों में पानी का बढ़ा हुआ स्तर और तेज बहाव प्रमुख कारण रहे। बिहार के कुछ हिस्सों में बाढ़ जैसी स्थिति के कारण जलस्रोतों में पानी अधिक है। ऐसे में जल लेने के लिए घाटों पर पहुंचे लोग गहराई का सही अंदाजा नहीं लगा सके और गहरे पानी में चले जाने से डूब गए। हालांकि, प्रत्येक घटना की परिस्थितियों की अलग-अलग पुष्टि आवश्यक है।

नवरात्रि के दौरान कलश स्थापना और धार्मिक शोभायात्राओं के लिए श्रद्धालु पारंपरिक रूप से नदियों और तालाबों से जल लेकर आते हैं। इन हादसों में भी लोग इसी धार्मिक परंपरा को निभाने के लिए घरों से निकले थे, लेकिन अचानक हुए हादसों ने उनके परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया।

इन घटनाओं ने त्योहारों के दौरान जलस्रोतों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासकर उन घाटों पर अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र होते हैं और पानी का बहाव तेज रहता है। बच्चों और तैरना नहीं जानने वाले लोगों को गहरे पानी में उतरने से बचना चाहिए।

ऐसे हादसों को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन और पूजा समितियों को घाटों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने की जरूरत है। श्रद्धालुओं को भी जलस्तर और बहाव की स्थिति का ध्यान रखते हुए सावधानी बरतनी चाहिए। नवरात्रि जैसे पवित्र पर्व के दौरान परंपराओं का पालन करते समय सुरक्षा को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं से बचा जा सके।

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