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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी चुनाव से पहले जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय करने, मौजूदा विधायकों के कामकाज का आकलन करने और संभावित उम्मीदवारों के बारे में जानकारी जुटाने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय नेतृत्व से जुड़ी पांच सदस्यीय टीम को उत्तर प्रदेश में अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है। इस टीम का नेतृत्व बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश के प्रभारी विनोद तावड़े कर रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, विनोद तावड़े राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेंगे। वहीं, उनके सहयोगियों को अलग-अलग क्षेत्रीय इकाइयों की जिम्मेदारी दी गई है। प्रदीप वर्मा को अवध और गोरखपुर क्षेत्र, अनंत ओझा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश और ब्रज क्षेत्र तथा जगदीश ईश्वरभाई पटेल को काशी और कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है। टीम की चौथी सहयोगी मेधा कुलकर्णी लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय से महिला और युवा केंद्रित कार्यक्रमों की निगरानी करेंगी।

बताया जा रहा है कि इन पांचों पदाधिकारियों को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में रहकर संगठनात्मक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कहा गया है। सूत्रों के अनुसार, विनोद तावड़े, प्रदीप वर्मा और मेधा कुलकर्णी लखनऊ में रहेंगे, जबकि जगदीश ईश्वरभाई पटेल वाराणसी और अनंत ओझा मेरठ में रहकर अपनी जिम्मेदारियां संभालेंगे। क्षेत्रीय स्तर पर उनकी मौजूदगी का उद्देश्य जिला इकाइयों और विधानसभा क्षेत्रों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखना है।

बीजेपी की इस रणनीति के तहत जिला स्तर के पदाधिकारियों, पार्टी विस्तारकों और विधानसभा प्रभारियों से नियमित फीडबैक लिया जा सकता है। इसमें मौजूदा विधायकों के कामकाज, संभावित उम्मीदवारों की स्थिति, संगठन की मजबूती और स्थानीय स्तर पर जनता की प्रतिक्रिया जैसे मुद्दे शामिल होंगे। पार्टी यह भी समझने की कोशिश करेगी कि किन विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को और सक्रिय करने की जरूरत है और कहां चुनावी रणनीति में बदलाव की आवश्यकता हो सकती है।

इस कवायद का एक अहम हिस्सा एंटी-इनकम्बेंसी, यानी मौजूदा जनप्रतिनिधियों या सरकार के प्रति संभावित नाराजगी का आकलन करना भी बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी कार्यकर्ता और पदाधिकारी स्थानीय लोगों के बीच जाकर सरकार के कामकाज, जनकल्याणकारी योजनाओं के असर और मौजूदा विधायकों की छवि से जुड़ी जानकारी जुटाएंगे। इसके आधार पर केंद्रीय नेतृत्व को जमीनी स्थिति की जानकारी मिल सकती है।

बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता अंकुश त्रिपाठी ने कहा है कि पार्टी हमेशा चुनावी मोड में काम करती है। उनके मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व से लेकर बूथ स्तर तक के कार्यकर्ता लगातार संगठनात्मक गतिविधियों में जुटे रहते हैं। वहीं, सूत्रों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उससे जुड़े संगठनों का सहयोग भी मिल रहा है।

उत्तर प्रदेश में बीजेपी की इस क्षेत्रीय रणनीति को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन की तैयारियों को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी का जोर केवल बड़े नेताओं की सभाओं पर नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर फीडबैक जुटाने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने और उम्मीदवारों के चयन से पहले विस्तृत जानकारी हासिल करने पर भी है। हालांकि, इन पदाधिकारियों के क्षेत्रीय प्रवास और जिम्मेदारियों से जुड़ी सभी जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

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