फ्रांस से लौटते ही CM भगवंत मान पर 50 हजार का कस्टम शुल्क? AAP ने लगाए आरोप
फ्रांस से लौटने के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने दावा किया है कि दिल्ली एयरपोर्ट पर कस्टम जांच के दौरान मुख्यमंत्री और उनके साथ आए स्टाफ को करीब तीन घंटे तक रोका गया। पार्टी के मुताबिक, सामान की जांच के बाद लगभग 50 हजार रुपये का कस्टम शुल्क भी लगाया गया। हालांकि, इस मामले में कस्टम विभाग की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।
AAP के पंजाब प्रवक्ता बलतेज पन्नू ने इस घटना को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पेरिस से लौटने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान को दिल्ली एयरपोर्ट पर लंबे समय तक रोका गया और उन पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। पन्नू ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई सामान्य प्रक्रिया के बजाय राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित थी।
बलतेज पन्नू ने दावा किया कि मुख्यमंत्री और उनके स्टाफ के सामान की जांच के दौरान कुछ ऐसी वस्तुएं मिलीं, जिन्हें कस्टम अधिकारियों के सामने घोषित नहीं किया गया था। इसके बाद नियमों के तहत करीब 50 हजार रुपये का कस्टम शुल्क लगाए जाने की बात कही गई। हालांकि, किन वस्तुओं को घोषित नहीं किया गया था और शुल्क किस आधार पर लगाया गया, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।
AAP प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पंजाब के मुख्यमंत्री को परेशान करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि भगवंत मान को एयरपोर्ट पर रोके जाने की कार्रवाई के पीछे राजनीतिक कारण हो सकते हैं। पन्नू के मुताबिक, अधिकारियों ने भी कथित तौर पर स्वीकार किया कि वे ऊपर से दबाव में हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पन्नू ने प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब के लोगों को अपमानित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री के फ्रांस दौरे को लेकर केंद्र और पंजाब सरकार के बीच पहले से चले आ रहे विवाद का भी जिक्र किया। AAP का दावा है कि मौजूदा कार्रवाई उसी नाराजगी का परिणाम हो सकती है।
भगवंत मान का फ्रांस दौरा पहले भी राजनीतिक विवाद का विषय रहा था। AAP प्रवक्ता के अनुसार, मुख्यमंत्री अदालत के आदेश का पालन करते हुए पेरिस गए थे। पार्टी ने अब एयरपोर्ट पर हुई कथित कार्रवाई को इसी दौरे से जोड़ते हुए केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
फिलहाल, इस पूरे मामले में AAP की ओर से लगाए गए आरोपों और कस्टम शुल्क से जुड़ी जानकारी की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। कस्टम विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि मुख्यमंत्री और उनके स्टाफ को कितनी देर रोका गया, शुल्क किस आधार पर लगाया गया और क्या यह कार्रवाई निर्धारित नियमों के तहत की गई थी।