फ्रांस में क्यों वायरल हुआ ‘बिस्मिल्लाह, से ले तेनेब्र’? छात्रों के इस नारे का क्या है मतलब
फ्रांस में हाई स्कूल के छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बीच एक अजीबोगरीब नारा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। ‘बिस्मिल्लाह, से ले तेनेब्र’ नाम का यह वाक्यांश प्रदर्शनकारियों के प्लेकार्ड, वीडियो और ऑनलाइन चर्चाओं में दिखाई दे रहा है। पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग के भी इस नारे को दोहराने की बात सामने आई है। दिलचस्प बात यह है कि छात्रों के बीच लोकप्रिय हुआ यह नारा किसी राजनीतिक भाषण से नहीं, बल्कि स्नैपचैट पर भेजे गए एक संदेश से चर्चा में आया।
इस नारे के वायरल होने के पीछे छात्रों का एक अलग ही तर्क है। प्रदर्शनकारियों को संदेह है कि उनके निजी ऑनलाइन समूहों में शामिल होने की कोशिश करने वाला एक व्यक्ति अंडरकवर पुलिस अधिकारी हो सकता था। छात्रों का आरोप है कि उस व्यक्ति ने युवाओं की बोलचाल और भाषा की नकल करके उनके समूह में जगह बनाने की कोशिश की। हालांकि, इस व्यक्ति की पहचान और उसके पुलिस से जुड़े होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
छात्रों ने कथित संदेश में इस्तेमाल किए गए वाक्यांश को मजाक का रूप दे दिया। अब इसका इस्तेमाल उस व्यक्ति की भाषा और उसके कथित प्रयासों पर तंज कसने के लिए किया जा रहा है। इस तरह एक संदिग्ध संदेश से शुरू हुआ वाक्यांश विरोध प्रदर्शनों की पहचान बनता जा रहा है। इसकी चर्चा फ्रांस के अलावा बेल्जियम और इटली में हुए प्रदर्शनों तक पहुंचने की भी खबर है।
‘बिस्मिल्लाह, से ले तेनेब्र’ का अर्थ समझने के लिए इसके दोनों हिस्सों को जानना जरूरी है। ‘बिस्मिल्लाह’ अरबी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है ‘ईश्वर के नाम पर’। इसे पारंपरिक रूप से किसी काम की शुरुआत करते समय कहा जाता है। फ्रेंच बोलचाल में इस शब्द का इस्तेमाल अलग-अलग संदर्भों में भी किया जा सकता है। वहीं, ‘से ले तेनेब्र’ फ्रेंच वाक्यांश है, जिसका अर्थ मोटे तौर पर ‘यह अंधेरा है’ होता है। युवा बोलचाल में इसका इस्तेमाल किसी गंभीर, निराशाजनक या बिगड़ी हुई स्थिति के लिए भी किया जा सकता है।
दोनों हिस्सों को मिलाकर इस नारे का भाव कुछ ऐसा निकलता है—‘ईश्वर के नाम पर, यह तो अंधेरा है।’ हालांकि, इसका सटीक आशय उस संदर्भ पर निर्भर करता है जिसमें इसे कहा जा रहा है। छात्रों के बीच यह वाक्यांश मुख्य रूप से हास्य और व्यंग्य के तौर पर लोकप्रिय हुआ है, न कि किसी औपचारिक राजनीतिक नारे के रूप में।
इसकी शुरुआत अक्टूबर की शुरुआत में वायरल हुए स्नैपचैट संदेश के स्क्रीनशॉट से जुड़ी बताई जा रही है। उस समय छात्र स्कूलों को बंद या बाधित करने की योजनाओं पर चर्चा करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे थे। वायरल स्क्रीनशॉट में ‘ममादू’ नाम के एक यूजर को कथित तौर पर एक समूह में शामिल होने की इच्छा जताते हुए संदेश भेजते देखा गया। संदेश में उसने लिखा था, ‘हाय, ईश्वर के नाम पर, यह तो अंधेरा है। भाई, यह ब्लॉकेड कब है?’
इस संदेश में इस्तेमाल की गई भाषा और युवाओं की बोलचाल की नकल ने छात्रों के बीच संदेह पैदा किया। उन्हें लगा कि कोई व्यक्ति उनकी गतिविधियों की जानकारी जुटाने के लिए समूह में शामिल होने की कोशिश कर रहा है। इसके बाद यह वाक्यांश मजाक का विषय बन गया और धीरे-धीरे विरोध प्रदर्शनों से जुड़े वीडियो और पोस्ट में इस्तेमाल होने लगा।
इस पूरे मामले में एक अहम बात यह है कि संदेह और पुष्टि के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। फ्रांस की पुलिस और गृह मंत्रालय ने कथित स्क्रीनशॉट पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है। साथ ही, संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान और उसके पीछे मौजूद व्यक्ति की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है। इसलिए यह दावा कि संदेश किसी अंडरकवर पुलिस अधिकारी ने भेजा था, फिलहाल छात्रों के संदेह के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
यह वायरल नारा दिखाता है कि सोशल मीडिया के दौर में किसी छोटे-से संदेश से भी विरोध प्रदर्शनों के बीच एक नई पहचान बन सकती है। फ्रांस के छात्रों ने जिस वाक्यांश को कथित घुसपैठ की कोशिश पर व्यंग्य के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया, वह अब इंटरनेट पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, इसके पीछे की वास्तविक घटना और संदेश भेजने वाले व्यक्ति की पहचान को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।