क्या चुनाव आयोग पर बढ़ेगा सियासी दबाव? ज्ञानेश कुमार के खिलाफ खरगे का ‘जन महाभियोग’
दिल्ली – देश की राजनीति में एक बार फिर चुनाव आयोग को लेकर टकराव तेज हो गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी गठबंधन INDIA ने अब एक नई राजनीतिक रणनीति तैयार की है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को विपक्ष उनके खिलाफ ‘जन महाभियोग’ आयोजित करने जा रहा है।
इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे प्रस्ताव पेश करेंगे, जबकि लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार पूरी कार्यवाही की अध्यक्षता करेंगी। वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समापन भाषण देंगे।
दरअसल, विपक्ष लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के तहत मतदाता सूचियों में हो रहे बदलाव को लेकर विपक्ष ने गंभीर आपत्तियां जताई हैं।
कांग्रेस और INDIA गठबंधन का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में पारदर्शिता को लेकर सवाल हैं और चुनावी प्रक्रिया में कथित तौर पर गड़बड़ियां हुई हैं। विपक्ष इसे ‘वोट चोरी’ का मुद्दा बता रहा है। हालांकि, ये विपक्ष के आरोप हैं और इन पर चुनाव आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण है।
ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए विपक्ष पहले भी संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव लाने की कोशिश कर चुका है। लेकिन अप्रैल में दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों ने उन प्रस्तावों को खारिज कर दिया था।
अब विपक्ष ने संसद की तर्ज पर एक प्रतीकात्मक जन महाभियोग की तैयारी की है। इसमें अलग-अलग राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि अपनी बात रखेंगे। बताया गया है कि इस कार्यक्रम में 21 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों समेत करीब 30 वक्ता शामिल हो सकते हैं।
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। विपक्ष जिस ‘जन महाभियोग’ की बात कर रहा है, वह कोई वास्तविक संवैधानिक महाभियोग प्रक्रिया नहीं है। यह एक प्रतीकात्मक राजनीतिक और सार्वजनिक कार्यक्रम है, जिसके जरिए विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर अपने सवाल उठाना चाहता है।
अब सवाल यह है कि क्या विपक्ष के इस आयोजन से चुनाव आयोग पर राजनीतिक और सार्वजनिक दबाव बढ़ेगा? क्या SIR और वोटर लिस्ट का मुद्दा आने वाले दिनों में विपक्ष की राजनीति का केंद्रीय मुद्दा बनेगा? एक तरफ विपक्ष चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी तरफ इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और संवैधानिक स्वतंत्रता पर बहस तेज होती दिखाई दे रही है।
30 अक्टूबर का यह आयोजन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच जारी टकराव का नया अध्याय है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि इस जन महाभियोग में विपक्ष कौन-कौन से सवाल उठाता है और उन सवालों पर क्या जवाब सामने आते हैं।