यूपी में सरकारी नौकरी का सपना होगा चकनाचूर! इन मामलों में कैरेक्टर सर्टिफिकेट पर लगेगा दाग
लखनऊ – उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बेहद अहम खबर है। अगर आप भी यूपी में सरकारी नौकरी पाने का सपना देख रहे हैं तो यह खबर आपके लिए जानना जरूरी है। योगी सरकार ने सरकारी नौकरियों में चरित्र और आपराधिक इतिहास के सत्यापन को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब अभ्यर्थियों के कैरेक्टर वेरिफिकेशन में कई अहम बातों की जांच होगी। कुछ गंभीर अपराधों में शामिल पाए जाने पर सरकारी नौकरी का रास्ता बंद हो सकता है।
सरकार की नई नीति के मुताबिक हत्या, दुष्कर्म, दहेज हत्या, फिरौती के लिए अपहरण और पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में अदालत द्वारा आरोप तय होने या दोषी ठहराए जाने पर अभ्यर्थी को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जा सकता है।
इतना ही नहीं, परीक्षा में नकल कराने वाले गिरोह, पेपर लीक, सॉल्वर गैंग, फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने और दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने वालों पर भी सख्ती की गई है। डिजिटल अरेस्ट और यूपीआई के जरिए ठगी जैसे गंभीर साइबर अपराध भी इस दायरे में शामिल हैं।
सरकार की नीति में हिंसक तरीके से मौजूदा सामाजिक व्यवस्था बदलने का घोषित उद्देश्य रखने वाले संगठनों के सदस्यों को सरकारी नौकरी के लिए अपात्र माना गया है। हालांकि, केवल राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी अभ्यर्थी को नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता। शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना भी अपने आप में अयोग्यता का आधार नहीं है।
इस सवाल का जवाब भी जानना जरूरी है। नई नीति के अनुसार केवल एफआईआर दर्ज होने, जांच लंबित रहने या आरोपपत्र दाखिल होने से कोई अभ्यर्थी अपने आप सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं हो जाएगा। अपराध की प्रकृति और अदालत में मामले की स्थिति के आधार पर फैसला लिया जाएगा।
वहीं, अगर किसी अभ्यर्थी ने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे, गिरफ्तारी या आपराधिक इतिहास की जानकारी आवेदन अथवा स्वघोषणा पत्र में छिपाई तो उसकी नियुक्ति रद्द हो सकती है। इसके साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
नई व्यवस्था में चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट आने तक नियुक्ति रोकना जरूरी नहीं होगा। सामान्य पदों के लिए निर्धारित स्वघोषणा पत्र मिलने के बाद औपबंधिक नियुक्ति पत्र जारी किया जा सकता है। हालांकि संवेदनशील और सुरक्षा से जुड़े पदों पर नियुक्ति से पहले विस्तृत जांच जरूरी होगी।
पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई को सामान्य मामलों में 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी। अगर रिपोर्ट प्रतिकूल आती है तो अभ्यर्थी को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाएगा।
कुल मिलाकर योगी सरकार की नई नीति का संदेश साफ है। सरकारी नौकरी सिर्फ परीक्षा पास करने से नहीं, बल्कि निर्धारित पात्रता और चरित्र सत्यापन की शर्तें पूरी करने से मिलेगी।
अब देखना होगा कि इन नए नियमों का सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं पर क्या असर पड़ता है और आने वाले समय में भर्ती प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और तेज हो पाती है।