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Budget 2026 में टैक्स स्लैब नहीं बदले, लेकिन ये 10 छोटे बदलाव करेंगे बड़ा असर

Budget 2026 में टैक्स स्लैब नहीं बदले, लेकिन ये 10 छोटे बदलाव करेंगे बड़ा असर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को यूनियन बजट 2026-27 पेश किया, जिसमें इनकम टैक्स स्लैब या बड़ी टैक्स छूट को लेकर कोई बड़ा ऐलान नहीं किया गया। हालांकि, बजट में कई ऐसे छोटे लेकिन अहम बदलाव किए गए हैं, जो सीधे तौर पर आम करदाताओं, निवेशकों, स्टूडेंट्स और एनआरआई की जेब पर असर डाल सकते हैं। सरकार का फोकस टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने पर दिखा।

बजट 2026 की सबसे बड़ी घोषणा यह रही कि 1 अप्रैल 2026 से देश में नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू होगा, जो करीब 60 साल पुराने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की जगह लेगा। सरकार का दावा है कि नया कानून इतना आसान होगा कि आम नागरिक बिना टैक्स एक्सपर्ट की मदद के भी अपना टैक्स समझ सके और रिटर्न फाइल कर सके।

विदेश में पढ़ाई और इलाज का खर्च उठाने वालों के लिए राहत दी गई है। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत अब शिक्षा और मेडिकल खर्च के लिए विदेश भेजी जाने वाली रकम पर TCS 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है। यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा, जिससे छात्रों और मरीजों पर टैक्स बोझ कम होगा।

रिटर्न फाइल करने वालों को भी थोड़ी राहत मिली है। रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा को 9 महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दिया गया है। हालांकि, बिलेटेड रिटर्न की डेडलाइन में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वहीं, ITR-1 और ITR-2 की आखिरी तारीख 31 जुलाई ही रहेगी, जबकि नॉन-ऑडिट मामलों में 31 अगस्त तक रिटर्न फाइल किया जा सकेगा।

शेयर बाजार में ट्रेड करने वालों के लिए खबर थोड़ी निराशाजनक है। इक्विटी फ्यूचर्स पर STT 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शंस पर 0.1% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है। इससे F&O ट्रेडिंग पहले से महंगी हो जाएगी और सक्रिय ट्रेडर्स की लागत बढ़ेगी।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) को लेकर टैक्स नियमों में भी स्पष्टता लाई गई है। अब मैच्योरिटी तक रखे गए SGB पर कैपिटल गेन टैक्स छूट सिर्फ उन्हीं निवेशकों को मिलेगी, जिन्होंने बॉन्ड RBI के मूल इश्यू से खरीदे हैं। सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए SGB पर टैक्स लग सकता है।

बजट 2026 में शेयर बायबैक पर फिर से कैपिटल गेन टैक्स लागू कर दिया गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि अब निवेशकों को केवल नेट प्रॉफिट पर ही टैक्स देना होगा, जिससे लंबी अवधि के निवेशकों पर टैक्स का असर सीमित रहेगा।

विदेशी आय या संपत्ति रखने वालों के लिए सरकार ने एक बार की 6 महीने की विदेशी संपत्ति डिस्क्लोजर स्कीम पेश की है। इस स्कीम के तहत टैक्सपेयर्स बिना किसी मुकदमे के अपनी विदेशी आय या संपत्ति घोषित कर सकते हैं। इसमें छोटे टैक्सपेयर, सैलरीड लोग, छात्र और NRI शामिल होंगे।

छोटे करदाताओं को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने लोअर या निल TDS सर्टिफिकेट को पूरी तरह ऑटोमेटेड सिस्टम से जारी करने का प्रावधान किया है। इसके अलावा फॉर्म 15G और 15H अब सीधे डिपॉजिटरी के जरिए कंपनियों तक पहुंचेंगे, जिससे रिफंड और प्रक्रिया दोनों आसान होंगी।

क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े नियमों को सख्त किया गया है। क्रिप्टो ट्रांजैक्शन की रिपोर्टिंग न करने पर एक्सचेंजों पर 200 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना लगेगा, जबकि गलत जानकारी देने पर 50,000 रुपये तक की पेनल्टी का प्रावधान किया गया है।

रियल एस्टेट सेक्टर में एक अहम बदलाव करते हुए सरकार ने कहा कि अब NRI से प्रॉपर्टी खरीदते समय रेजिडेंट खरीदारों को TAN लेने की जरूरत नहीं होगी। केवल PAN के जरिए ही TDS कटौती संभव होगी, जिससे प्रक्रिया तेज और सरल हो जाएगी।

कुल मिलाकर, बजट 2026 में भले ही टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव न किया गया हो, लेकिन इन छोटे-छोटे फैसलों से आम करदाता की सुविधा बढ़ेगी, अनुपालन आसान होगा और कुछ मामलों में जेब पर बोझ भी बढ़ सकता है।

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