संसद में राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर अनोखा प्रदर्शन, संत बनकर पहुंचे पप्पू यादव
नई दिल्ली: संसद परिसर में शुक्रवार को राम मंदिर चढ़ावा से जुड़े कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया। पेपर लीक समेत अन्य मुद्दों पर जारी राजनीतिक टकराव के बीच विपक्ष ने इस बार अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े आरोपों को केंद्र में रखते हुए सरकार से जवाबदेही और संसद में इस विषय पर चर्चा की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव पुजारी के वेश में संसद भवन के मकर द्वार पर पहुंचे और अपने पास एक दान पेटी रखकर बैठ गए। कुछ देर बाद समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी उनके पास प्रतीकात्मक रूप से दान पेटी रखी। इसके बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित कई विपक्षी सांसदों ने उस दान पेटी में पैसे डाले।
प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव ने दान पेटी में डाले गए पैसों को निकालकर अपनी जेब में रख लिया। विपक्षी नेताओं ने इसे एक सांकेतिक प्रस्तुति बताते हुए दावा किया कि यह राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ियों की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास था। इसके बाद कई सांसदों ने नारेबाजी करते हुए इस मामले की निष्पक्ष जांच और संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की।
फैजाबाद से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि अयोध्या से जुड़े इस मुद्दे को उनकी पार्टी गंभीरता से उठा रही है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम की नगरी से जुड़े किसी भी विवाद की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और इस विषय पर संसद में चर्चा कराई जानी चाहिए। उनके अनुसार, यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं बल्कि आस्था और पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है।
वहीं सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में चढ़ावा देने आने वाले श्रद्धालुओं के साथ वित्तीय अनियमितताएं हुईं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष लगातार इस विषय पर संसद में चर्चा की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक इसकी अनुमति नहीं दी गई। धर्मेंद्र यादव ने यह भी आरोप लगाया कि मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और रिकॉर्ड की भी जांच कराई जानी चाहिए।
दूसरी ओर, विपक्षी सांसदों ने इस प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया और केंद्र सरकार से जवाब मांगा। फिलहाल, राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। हालांकि, विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है और मामले में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।