मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग न्यूज़
काला जादू से घट रही हाइट! 165 से 158 सेंटीमीटर हुई लंबाई, युवक ने कलेक्टर से लगाई गुहार UP International Trade Show का आगाज, अमित शाह-योगी ने दिखाई यूपी के हुनर की ग्लोबल ताकत योगी सरकार का बड़ा ग्लोबल दांव, UPITS 2026 में 85 देशों के खरीदारों से जुड़ेंगे यूपी के उद्यमी पंजाब में ED रेड पर सियासी संग्राम, सिसोदिया बोले- छापेमारी में कुछ नहीं मिलने वाला SIR विवाद पर राहुल गांधी का बड़ा हमला, बोले- ‘वोट चोरी’ के बाद पाप धोने के लिए लाया गया SIR अखिलेश यादव की PDA रथयात्रा का अनोखा स्वागत, बुलडोजर से बरसाए गए फूल पंजाब में पटवारियों की हड़ताल खत्म, 1000 से ज्यादा पदों पर भर्ती को CM मान ने दिए निर्देश लखनऊ में आज से 4,526 प्लॉट का रजिस्ट्रेशन, CM योगी करेंगे नैमिष नगर-वरुण विहार का शुभारंभ यूपी चुनाव से पहले BJP का युवाओं पर फोकस, कॉलेज-यूनिवर्सिटी में चलेगा ‘सार्थक युवा संवाद’ धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा ऐलान, ‘हिंदू राष्ट्र’ संकल्प को लेकर 11 अक्टूबर से निकालेंगे रथ यात्रा

पद्मश्री से सम्मानित होंगी 76 वर्षीय निर्मला देवी, जिन्होंने सुजनी कला को अमेरिका तक पहुँचाया

पद्मश्री से सम्मानित होंगी 76 वर्षीय निर्मला देवी, जिन्होंने सुजनी कला को अमेरिका तक पहुँचाया

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की सुजनी कढ़ाई कला को देश और दुनिया में पहचान दिलाने वाली निर्मला देवी को इस साल पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। 76 वर्षीय निर्मला देवी ने न केवल इस पारंपरिक कला को पुनर्जीवित किया, बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर उनकी इस उपलब्धि को सम्मानित करते हुए उन्हें पद्म अवार्ड देने की घोषणा की। सुजनी कढ़ाई कला के लिए जीआई टैग दिलाने में उनका योगदान बेहद खास रहा है। उनके प्रयासों से जिले की सैकड़ों महिलाओं को रोजगार मिला और वे आत्मनिर्भर बनीं।

सुजनी कढ़ाई की पहचान बनीं निर्मला देवी

निर्मला देवी, जो आज सुजनी कढ़ाई कला की वैश्विक राजदूत मानी जाती हैं, ने इस कला को पिछले चार दशकों में एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया। जब उन्हें पद्मश्री पुरस्कार मिलने की खबर मिली, तो उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि इस कला से जुड़ी सभी महिलाओं की जीत बताया। साधारण सूती कपड़ों पर सुजनी कढ़ाई से सुंदर कलाकृतियां बनाने की यह कला, उनके प्रयासों के कारण, आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मशहूर है। कभी अपने घर में बैठकर कशीदाकारी करने वाली निर्मला देवी की रचनाएं अब लंदन और अमेरिका जैसे देशों के संग्रहालयों की शोभा बढ़ा रही हैं।

कठिन संघर्ष की कहानी

मुजफ्फरपुर के भूसरा गांव में खुशी का माहौल है, जहां निर्मला देवी का बचपन और संघर्षों से भरा जीवन बीता। शादी के 12 साल बाद, पति और ससुराल वालों द्वारा छोड़े जाने के बाद, निर्मला देवी अपनी बेटी को गोद में लेकर मायके लौट आईं। हालांकि, परिवार ने उन्हें सहारा दिया। आज उन्हीं के प्रयासों की बदौलत भूसरा गांव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हो चुका है। भूसरा महिला विकास समिति की संस्थापक और अध्यक्ष के रूप में उन्होंने 15 से अधिक गांवों की 1000 से ज्यादा महिलाओं को सुजनी कढ़ाई का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया। उनके इस योगदान ने कई महिलाओं की जिंदगी बदल दी और उन्हें एक नई पहचान दी।

सुजनी कढ़ाई का ऐतिहासिक सफर

सुजनी कढ़ाई एक ऐसी परंपरागत कला है, जिसमें पुराने कपड़ों के टुकड़ों को जोड़कर शॉल या अन्य उपयोगी वस्त्र बनाए जाते थे। समय के साथ, इस कला में सुंदर कशीदाकारी का काम जोड़ा गया, जिसमें मछलियां, फूल, घर और अन्य आकृतियां बनाई जाने लगीं। धीरे-धीरे इस शिल्प को देशभर में पहचान मिलने लगी। 2006 में सुजनी कढ़ाई को जीआई टैग मिला, जिसने इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचा दिया। आज महिलाएं इस कला का इस्तेमाल कुशन कवर, कुर्ते, साड़ियां, लेटर होल्डर जैसी चीजें बनाने के लिए कर रही हैं।

व्यक्तिगत जीवन और प्रेरणा

निर्मला देवी का जीवन संघर्षों और प्रेरणाओं से भरा है। 1960 में उनकी शादी हुई, लेकिन 1972 में ससुराल वालों ने उन्हें छोड़ दिया। उनके पति शराब के आदी थे और अक्सर उनके साथ दुर्व्यवहार करते थे। निर्मला देवी ने अपने संघर्षों से हार न मानते हुए, अपनी कला और मेहनत से खुद को खड़ा किया। 2010 में, जब उनके पति बीमार हुए, तो उन्होंने उन्हें अपने पास बुलाया और उनकी देखभाल की। 2011 में उनके पति का निधन हो गया। उनकी बेटी, जो दरभंगा में अपने परिवार के साथ रहती है, उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा है।

निर्मला देवी का जीवन यह साबित करता है कि कठिनाइयों के बावजूद, मेहनत और लगन से कोई भी व्यक्ति अपनी और अपने समाज की किस्मत बदल सकता है। सुजनी कढ़ाई के प्रति उनका जुनून और योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।

Share
अगला लेख → पुणे में फैल रही जानलेवा बीमारी ,अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति…

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *